Abstract
वर्तमान समय में रात को सोने से पहले फ़ोन चलाना हमारी daily routine का हिस्सा बन गया है। कोई सोशल मीडिया scroll करता है, कोई YouTube videos देखता है, तो कोई सोने से पहले message या reels देखने में समय व्यतीत करता है। कई बार हमें लगता है की कुछ मिनट फ़ोन चला लेने से थोड़े न कुछ फ़र्क़ पड़ेगा, लेकिन हमारी यही आदते धीरे-धीरे हमारी नींद और daily routine को प्रभावित कर सकती है।
यदि आप सोने से पहले मोबाइल चलाते है तो आपकी आँखों पर strain, दिमाग का ज्यादा देर तक active रहना और सोने में देरी जैसी समस्याएं हो सकती है। खासकर रात में लगातार screen देखने से ऐसा महसूस हो सकता है की नींद आने के बजाय हम और ज्यादा जाग रहे है। इसका असर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और दिनभर की energy पर भी फ़र्क़ पड़ सकता है।
- लेकिन क्या फ़ोन की screen ही इसका एकमात्र कारण है?
- क्या रात में फ़ोन चलाने से हर व्यक्ति की नींद खराब होती है?
- और अगर सोने से पहले फ़ोन छोड़ना मुश्किल हो, तो ऐसी कौन-सी छोटी आदते अपनाई जा सकती है जो नींद को बेहतर बनाने में मदद करें?
हम इस Article में पढ़ेंगे कि रात में सोने से पहले फोन चलाने और नींद के बीच क्या संबंध है, Screen exposure आपकी नींद की आदत को प्रभावित कर सकता है और सोने के समय फोन का उपयोग कम करने के लिए क्या-क्या कर सकते हैं। साथ ही जानेंगे कि बेहतर नींद के लिए सिर्फ फोन को दूर रखना ही नहीं, बल्कि पूरी सोने की दिनचर्या को सुधारना क्यों ज़रूरी है।
Introduction

हम हर वो चीज़ करना चाहते है जिससे हमें ख़ुशी मिलती है, लेकिन जब भी हमें ख़ुशी मिलती है तो हमारे दिमाग में एक चीज़ उत्पन्न होती है वो है Dopamine. games, intimacy, mobile इन सबसे Dopamine release होता है। कुछ देर बाद Dopamine का लेवल कम हुआ। फिर वह वापिस से Brain को Dopamine का rush चाहिए होता है और फिर Dopamine release होता है और आपको फिर Craving होती है। और हम ख़ुशी के लिए बार-बार वही काम करते है।
Notification आई क्या होगा, रिंग की आवाज़ आई, फोन चेक करना है, मैसेज का जवाब आया, क्या आया होगा, उसकी ज़िंदगी में क्या चल रहा है पता होना चाहिए, न्यूज़ में क्या चल रहा है हमें जानना होता है… इस तरह हम फोन में ही घुसते जाते हैं। और इस तरह हमें बार-बार चेक करने की आदत हो जाती है। और हम मोबाइल के आदी हो जाते हैं।
और हम अपनी working memory को खत्म करते जा रहे हैं, इससे हमें मानसिक थकान होती है। इसलिए आज के समय में लोग जल्दी थक जाते हैं, अकेलापन महसूस करते हैं। इसका असर हमारे काम पर, हमारे करियर पर और हमारी ज़िंदगी, रिश्तों पर पड़ता है।
क्यों रात को सोने से पहले फ़ोन चलाना बन गई हमारी रोज की आदत?
दिनभर के बाहर और घर के कामो से free होकर जब हम बिस्तर पर जाते है, तो अक्सर सोचते है- “बस पांच मिनट फ़ोन देख लेते है।” लेकिन Message चेक करते-करते, Reels देखते हुए या अगला video खोलते हुए कब काफी समय निकल जाता है, पता ही नहीं चलता। धीरे-धीरे हम social media scroll में इतना खो जाते है कि हमें पता ही नहीं चलता कि कितना देर हो गई है।
कई लोग दिनभर के काम में इतना व्यस्त होते है कि उन्हें रात का ही थोड़ा-सा समय मिलता है। जिसमे उन्हें घर की जिम्मेदारियों के बीच अपने मन का video या किसी दोस्त से बात करने का मौका नहीं मिल पाता। ऐसे में उन्हें फ़ोन चलाना अच्छा लगता है। कभी किसी के जबाब का इंतजार होता, तो कभी अधूरा video पूरा देखना होता है। ऊपर से हर बार स्क्रीन पर कुछ नया दिख जाता है और हम सोचते है, “बस ये आखिरी वाला।” इसी तरह धीरे-धीरे सोने से पहले फ़ोन देखना रोज की आदत बन जाता है। और हमारी सोने की आदत बिगड़ने लगती है।
कई लोग अपने मनोरंजन में disturb न होने के लिए अपने बच्चो को phone में video games या cartoon लगा देते है। जिससे छोटे बच्चे भी फ़ोन के आदी होने लगते है, और धीरे-धीरे बच्चो का immune system और नींद की आदत बिगड़ने की संभावना रहती है।
13 मार्च 2026 को news में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में किए गए एक सर्वे में 62% अभिभावकों ने बताया कि स्मार्टफोन के इस्तेमाल के कारण उनके किशोर बच्चे रात 11 बजे के बाद सोते है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि लगभग एक-तिहाई किशोर रात के खाने के बाद दो घंटे से अधिक समय स्क्रीन पर बिताते है।
नींद पूरी न होने पर क्या प्रभाव पड़ सकता है (Sleep Deprivation Effects)
रात ने फ़ोन देखते-देखते देर हो जाए और सुबह तय समय पर उठना पड़े, तो नींद का समय कम हो जाता है। अगले दिन अलार्म बजने पर उठने का मन नहीं करता, काम के बीच जम्हाई आती रहती है और छोटी-सी बात भी परेशा कर सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने को sleep deprivation कहते है। नींद की कमी का असर सिर्फ हमारी थकान तक ही सीमित नहीं है यह रोजमर्रा की जिंदगी में ये बदलाव महसूस हो सकते है।
- दिनभर सुस्त रहना: जब भी हम कोई काम करें या पढाई करें तो हमें नींद आने लगती है।
- ध्यान लगाने में परेशानी: एक ही line को बार-बार पढ़ना या काम में छोटी-छोटी गलतिया होना।
- बात-बात पर गुस्सा करना: छोटी छोटी बातो पर चिड़चिड़ापन होना, अपनी भावनाओ को संभालना मुश्किल हो जाना।
- याद रखने या फैसले लेने में परेशानी होना: बाते भूलना या सामान्य काम पूरा करने में ज्यादा समय लग सकता है।
- प्रतिक्रिया धीमी होना: सड़क पर किसी अचानक बदलाव पर प्रतिक्रिया देने में देर हो सकती है, जिससे ड्राइविंग के दौरान कोई भी खतरा बढ़ सकता है।
एक दिन देर से सोना और हर दिन देर से सोने में बहुत बड़ा फ़र्क़ है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न मिलना हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापे और हृदय रोग के बढे हुए जोखिम से जुड़ा है। इसका मतलब यह नहीं की कभी देर रात तक फ़ोन चलाने से बीमरिया हो जायगी। हमें ध्यान देने योग्य बात यह है कि हमारा रोजाना नींद का cycle कितने बजे का है।
क्या कम नींद के वजह से Frequent Headache Causes हो सकते है?

नींद पूरी न होने के बाद कभी-कभी हमारा सर में दर्द भी महसूस हो सकता है। यदि आप फ़ोन चलाने के वजह से देर रात से सो रहे है तो आपके सोने का routine बिगड़ जाता है जो धीरे-धीरे हमारे सिर दर्द की एक वजह हो सकता है। हालाँकि “हर” सिरदर्द का कारण फ़ोन या नींद की कमी नहीं होता। Frequent Headache Causes में तनाव, पानी कम पीना, समय पर खाना न खाना, आँखों पर जोर पड़ने लगना, migraine जैसी परेशानिया भी शामिल हो सकती है। इसलिए ध्यान दे कि सिरदर्द कब होता है- देर तक स्क्रीन देखने के बाद, कम सोने पर या खाना छोड़ने पर। इससे उसके मुख्य कारण समझने में मदद मिल सकती है। यदि आपका सिरदर्द बार-बार हो रहा है, या बढ़ रहा है या रोज के काम प्रभावित कर रहा है, डॉक्टर से सलाह ले।
सोने से पहले फ़ोन कैसे नींद को प्रभावित करेगा ?
कभी ऐसा हुआ है कि आपको नींद आ रही थी और आपने फ़ोन उठा लिया, लेकिन कुछ video देखने के बाद नींद जैसे गायब हो गई? या आपने समय पर सोने का सोचा था, मगर scroll करते-करते आधी रात हो गई? फ़ोन हमारी नींद को अलग-अलग तरीको से प्रभावित कर सकता है। इसमें screen की रोशनी के साथ यह भी मायने रखता है कि हम क्या देख रहे है और कितनी देर तक फ़ोन इस्तेमाल कर रहे है।
screen की रोशनी और melatonin का संबंध
हमारे शरीर में एक body clock होती है जो सोने और जागने के समय को व्यवस्थित करने में मदद करती है। शाम को अँधेरा बढ़ने पर सामान्यत: melatonin नाम के hamones का level बढ़ता है, जो शरीर को रात होने का संकेत देता है।
फ़ोन की screen से निकलने वाली रोशनी, जिसमे blue light भी शामिल होती है, इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। शाम या रात में पर्याप्त रोशनी का संपर्क melatonin के बढ़ने को दबा सकता है और body clock को signal दे सकता है। इससे सोने में देरी हो सकती है। हालाँकि, इसका असर रोशनी की तीव्रता, इस्तेमाल के समय और अवधि के अनुसार बदलता है। ऐसा नहीं है कि थोड़ी देर screen देखते ही melatonin बनना पूरी तरह बंद हो जाता है।
Scrolling और message का समय

कई बार समस्या सिर्फ screen की रोशनी नहीं होती। किसी दोस्त से बातचीत अधूरी हो, कोई रोमांचक video चल रहा हो या काम का message आ जाये, तो हम उसी बारे में सोचते रह जाते है। ऐसे में आराम करने के लिए लेटने के बावजूद मन बातचीत या काम में उलझा रहता है।
दूसरी बात बहुत सीधी है-जो समय खोने के लिए रखा था, वह फ़ोन पर निकल जाता है। मान लीजिए आपको सुबह छह बजे उठना है और आपने रात 12 बजे सोने का सोचा था। अगर scrolling करते हुए 1 बज जाए, तो सोने के लिए हमारा समय कम हो जाता है।
इसलिए screen की setting बदलना ही पर्याप्त नहीं है। यह देखना भी जरूरी है कि फ़ोन आपकी bedtime को कितना आगे बढ़ा रहा है। अगर हर रात “बस एक विडियो और” के बाद सोने में देर हो रही होती है, तो फ़ोन बंद करने का एक तय समय बनाना उपयोगी शुरुआत हो सकती है।
क्या Night Mode चालू करने से रात में फ़ोन चलाना ठीक रहता ?
कई बार हम लोग सोचते है कि “में तो night mode में फ़ोन चला रहा हु’ इससे क्या ही नींद पर प्रभाव पड़ेगा? यह सवाल आपका स्वाभाविक है। फ़ोन की screen का हल्का पीला रंग हो जाने पर लगता है कि अब देर तक फ़ोन देखना safe रहेगा।
Night mode से screen में क्या बदलता है
Night shift या eye comfort जैसे features सामान्य तौर पर screen के रंगो को गर्म यानि पीले या नारंगी रंग की और बदलते है। इसका मुख्य उद्देश्य screen से निकलने वाली नीली रोशनी को कम करना होता है। हालाँकि Dark Mode एक अलग ही feature है। यह मुख्य रूप से App या Screen का background dark करता है। दोनों को एक ही चीज़ समझना सही नहीं है।
नींद के मामले में केवल स्क्रीन का रंग बदलना ही पर्याप्त नहीं होता है। 2021 में प्रकाशित एक अध्ययन में युवा वयस्कों के पूरे समूह में iPhone का Night Shift चालू करने से नींद के मापों में स्पष्ट सुधार नहीं मिला। यह एक अध्ययन है, इसलिए इससे हर व्यक्ति और हर फोन के लिए अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। फिर भी, बेहतर नींद के लिए केवल इस setting पर भरोसा करना उचित नहीं होगा।
बेहतर नींद के लिए Healthy Lifestyle Habits कैसे बनाए 
सोने की तैयारी केवल बिस्तर पर पहुंचने के बाद शुरू नहीं होती है। देर शाम तक काम निपटाना, अगले दिन की तैयारी करना और फिर सीधे सोने की कोशिश करना। इस जल्दबाजी में आराम के लिए जगह कम बचती है। इसलिए अपनी शाम में कुछ छोटे बदलाव करना जरूरी हो सकता है।
Next day की तैयारी
कभी बिस्तर पर सोने के बाद ही हमें याद आता है कि सुबह कौन-सा काम करना है, कौन-सी फाइल भेजनी है या बच्चो के लिए क्या-क्या तैयार रखना है। फिर इन्ही सभी चीज़ो के लिए फ़ोन उठाना पड़ जाता है। इससे बचने के लिए जरूरी तैयारी शाम में ही कर ले। कपडे निकलकर रखें, बैग तैयार करे और अगले दिन के दो-तीन जरूरी काम कागज पर लिख लीजिए। अगर अलार्म या calender सेट करना है, तो वह भी इसी समय कर लें। यह एक व्यावहारिक तरीका है, जिससे बिस्तर पर पहुंचने के बाद छोटी-छोटी सी तैयारियो के लिए फ़ोन खोलने की जरूरत कम पड़ सकती है।
शाम की चाय-कॉफ़ी और खाने के समय पर ध्यान दीजिए
यदि आप देर शाम थकान दूर करने के लिए कॉफी कड़क चाय पीते हो तो अपनी इस आदत पर भी नजर डालिए। इसमें मौजूद कैफीन नींद में बाधा डाल सकता है और इसका असर कई घंटे तक रह सकता है। सोने के करीब बहुत भारी भोजन करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। इसका यह अर्थ नहीं की आप भूखे सो जाए। बल्कि अपनी जरूरत के अनुसार भोजन करें और देखें कि देर से खाने या चाय-कॉफी पीने के बाद आपको सोने में परेशानी तो नहीं होती है।
कमरे को आराम के लिए तैयार करें
कमरे में बाहर का शोर, तेज रोशनी या ज्यादा गर्मी हो तो फ़ोन रख देने के बाद भी आराम करना मुश्किल लग सकता है। सोने की जगह को जहाँ संभव हो शांत, अँधेरा और comfortable ठंडा रखे। रोज सोने और उठने का समय लगभग समान रखना भी बेहतर sleep routine का हिस्सा है।
क्या आपके बच्चे सोने की दिनचर्या में भी फ़ोन शामिल हो गया?

“मम्मी cartoon लगा दो तभी सोऊंगा” अगर आपके घर में भी सोने के समय ऐसी demand आती है, तो बच्चे की bedtime रूटीन पर ध्यान देने की जरूरत है। कभी सफर में, कभी काम निपटाने के लिए या बच्चे को शांत करने के लिए दिया गया फ़ोन धीरे-धीरे रात की दिनचर्या में शामिल हो सकता है। यहाँ बच्चे को डांटने से पहले यह समझना जरूरी है कि फ़ोन उसकी शाम का हिस्सा बना कैसे और उसकी जगह क्या रखा जा सकता है।
पहले ही फ़ोन बंद करने का नियम बताए
video के बीच फ़ोन छीनने के बजाय बच्चो को बताए कि फ़ोन देखने का समय कितना रहता है उसके बाद क्या करना है। छोटे बच्चे से कह सकते है, “अब कार्टून बंद करके दांत साफ करेंगे, फिर तुम्हारी पसंद की कहानी पढ़ेंगे। ” किशोर बच्चो के साथ नियम बनाने में उनकी राय भी पूछ ले। उनसे पूछे कि होमवर्क, दोस्तों से बातचीत और मनोरंजन के लिए उन्हें कब फ़ोन चाहिए। फिर ऐसा समय तय करे जो उनकी नींद के लिए रखे समय में दखल न दे। AAP के अनुसार बच्चो के लिए सोने से एक घंटे पहले screen से दुरी और नियमित bedtime routine की सलाह देती है। इसमें mobile के साथ TV, tablet और gaming की स्क्रीन भी शामिल करें।
फोन की जगह बच्चे को और विकल्प दें
बच्चे के लिए फोन हटाना आसान नहीं लगेगा अगर उसके बाद करने को कुछ न हो। छोटे बच्चों को चित्रों वाली किताब चुनने दें, कहानी सुनाएं या पूछें कि आज दिन में सबसे अच्छा क्या हुआ। बड़े बच्चों के साथ उनकी पसंद की किताब या किसी शांत गतिविधि पर बात कर सकते हैं। बच्चे को कुछ छोटे विकल्प देना उपयोगी शुरुआत है-“आज जानवरों वाली कहानी पढ़ें या अंतरिक्ष वाली?” इससे वह नई दिनचर्या में भाग ले सकता है।
माता-पिता भी घर के नियम अपनाएं
अगर बच्चे का फोन रखवा दिया जाए, लेकिन बड़े उसी समय वीडियो देखते रहें, तो उसे नियम अनुचित लग सकता है। परिवार के सभी सदस्यों के लिए रात में उपकरण रखने की एक जगह तय कर सकते हैं। जरूरी काम या कॉल के अपवाद हों, तो उन्हें साफ समझाएं।
AAP की Family Media Plan guidance में माता-पिता को भी योजना का हिस्सा बनाने और अपनी आदतों से उदाहरण पेश करने पर जोर दिया गया है। बच्चे की आदत बदलने में पूरे परिवार की भागीदारी मायने रखती है।
यह पहचाने कि रात में फ़ोन आपकी नींद का समय कैसे ले रहा है ?
हमारे फ़ोन का कुल Screen time पूरी कहानी नहीं बताता। दिन में पढाई या काम के लिए इस्तेमाल और सोने के लिए रखे समय में मनोरंजन करने के बीच अंतर है। इसलिए सिर्फ घंटो की गिनती देखने के बजाय अपने इस्तेमाल का समय समझे।
आप आपने आप से ये सवाल पूछिए:
- क्या में जितने बजे सोना चाहता हूँ, उस समय फ़ोन रख पाता हूँ?
- बार-बार किसी App को खोलता हूँ?
- बार-बार किसी काम के लिए फ़ोन उठाकर दूसरी चीज़े देखने लगता हूँ?
- क्या सुबह उठने का समय वही रहता है, लेकिन रात में सोने का समय आगे बढ़ जाता है?
- क्या छुट्टी वाले दिन भी अपनी इच्छा से फ़ोन से दूरी बनाना मुश्किल लगता है?
इन सवालों का जबाब हाँ होना किसी बीमारी या addiction की पुष्टि नहीं करता। यह अपनी आदत को करीब से देखने का अवसर है।
Screen Time Report को बदलाव की शुरुआत बनाए

कई फ़ोन में Screen Time या Digital Wellbeing जैसी सुविधा होती है। उसमे देखे कि किन apps पर सबसे ज्यादा ही समय जाता है। इसके बाद एक ऐसा बदलाव चुनिए जो आपकी जरूरत से मेल खाता हो। उदहारण के लिए, जिस app को बिना किसी जरूरी काम के खोलते है, उसे home screen से हटा सकते है या उसके लिए समय की सीमा लगा सकते है। इन settings को अपने लिए एक याद दिलाने वाला माध्यम समझे। लक्ष्य केवल छोटी संख्या देखना नहीं, बल्कि नींद के लिए पर्याप्त समय बचाना है।
Important call के लिए फ़ोन पास रखना हो, तो क्या करे?
हर व्यक्ति फ़ोन को रात में पूरी तरह से बंद नहीं सकता है। क्योकि किसी के परिवार सदस्य शहर के बाहर रहते है, किसी की देखभाल की जिम्मेदारी रहती है और किसी को काम से जुडी जरूरी कॉल आ सकती है। ऐसी स्थिति में अपने routine के अनुसार व्यवस्था बनाए।
जरूरी संपर्क और सामान्य notifications अलग रखें
अपने फ़ोन की settings देखकर जांच करें कि क्या Do Not Disturb में चुनिंदा contacts की call आने की अनुमति दे सकते है। इससे जरूरी संपर्क उपलब्ध रह सकते है, जबकि shopping apps, social media या दूसरे गैर जरूरी alerts बंद रखे जा सकते है। विकल्प फ़ोन और operating system के अनुसार अलग होंगे।
अगर alarm के लिए फ़ोन चाहिए, तो पहले alarm सेट करे और आवाज जांच ले। फिर उसे ऐसी जगह रख सकते है जहाँ सुबह सुनाई दे, लेकिन लेटे हुए स्क्रीन देखने के लिए हाथ में लेना आसान न हो।
यदि रात में उपलब्ध रहना आपकी नौकरी का हिस्सा है, तो सुझाव अपनी ड्यूटी के अनुसार अपनाएं। जरूरत होने पर टीम से स्पष्ट करें कि किन बातों के लिए तत्काल कॉल जरूरी है और कौन-से संदेश अगले कार्यदिवस तक रुक सकते हैं।
Conclusion
रात को फ़ोन चलाना कितना नुकसानदायक हो सकता है हमारी सेहत के लिए इसका जबाब केवल “हाँ” या “नहीं” में नहीं दिया जा सकता। चिंता तब बढ़ती है, जब उसका इस्तेमाल नियमियत रूप से नींद के लिए कम पढ़ने लगे या daily life effect होने लगे।
Sleep deprivation effects को समझने का उद्देश्य फ़ोन से डर पैदा करना नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार उसका सही उपयोग तय करना है। फोन उपयोगी है, लेकिन आराम के लिए भी दिन में जगह चाहिए। आज से कोई एक बदलाव चुने – गैर जरूरी alerts बंद करना, रात का app limit तय करना या जरूरी call के लिए अलग plan बनाना। कुछ दिनों के बाद देखिए कि यह बदलाव निभाना कितना आसान रहेगा। परेशानी बनी रहे, तो मदद जरूर लीजिए। बेहतर नींद के लिए अपनी आदतों को समझना और जरूरी पड़ने पर सही सलाह लेना, दोनों जरूरी है।
Disclaimer
यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए लिखा गया है। हर व्यक्ति की नींद और स्वस्थ्य संबंधी जरूरते अलग-अलग होती है। लगातार आप नींद की परेशानी, बार-बार सिरदर्द या अन्य चिंताजनक विषयो में लक्षणों में योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें। नींद की दवाएं, melatonin या supplements खुद से शुरू न करें।

Riya Asati is an assistant professor and JRF-qualified researcher with 3+ years of experience in research-based content writing. Her expertise includes healthcare, medical, wellness, and educational content. She focuses on presenting health information in a clear, accurate, evidence-informed, and easy-to-understand manner. Through her writing, she aims to help readers understand important health topics and make informed decisions about their well-being.





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