Abstract:
Skin Fungal Infection एक नॉर्मल बीमारी है लेकिन अक्सर लोग इसकी सही पहचान नहीं कर पाते है और लगभग सारे स्किन फंगल इन्फेक्शन को एक समान समझ लेते है और दूसरी गलती करते है कि बिना सही पहचान किये उपचार लेना शुरू कर देते है, जबकि फंगल इन्फेक्शन के कई अलग-अलग प्रकार होते हैं और प्रत्येक के लक्षण, कारण तथा इलाज भी अलग होते हैं।
इस लेख में Skin Fungal Infection के प्रमुख प्रकारो को विस्तार से और सरल भाषा में समझाने की कोशिश की गई है ताकि सही उपचार लेने में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। साथ ही यह भी बताया गया है कि किन लोगों में इसका खतरा अधिक होता है, यह कैसे फैलता है और डॉक्टर इसकी पहचान तथा जांच किन तरीकों से करते हैं। सही जानकारी और समय रहते सही इलाज फंगल इन्फेक्शन का उचित उपचार है।
Introduction
कभी ऐसा आपके साथ भी हुआ होगा कि आपने स्किन पर होने वाली हर खुजली या लाल चकत्ते को दाद समझकर कोई भी क्रीम लगा ली होगी? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। लेकिन सच यह है कि हर खुजली दाद नहीं होती। Skin Fungal Infection अलग-अलग प्रकार के होते हैं, जिनके लक्षण, कारण और इलाज भी अलग होते हैं। सही पहचान के बिना उपचार लेना इन्फेक्शन को ओर बढ़ा सकता है।
इस लेख में हम सरल भाषा में जानेंगे कि Skin Fungal Infection के प्रमुख प्रकार क्या हैं, इन्हें कैसे पहचानें और सही समय पर सही इलाज क्यों जरूरी है। यदि फंगल इन्फेक्शन की सही समय पर पहचान हो जाए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उचित उपचार शुरू किया जाए, तो अधिकांश मामलों में इसे आसानी से कण्ट्रोल किया जा सकता है। हल्के मामलों में डॉक्टर अक्सर एंटीफंगल क्रीम लगाने की सलाह देते हैं। इसी तरह बाजार में उपलब्ध Leebord Anti-Fungal Cream जैसी क्रीम भी स्किन की देखभाल के लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकती है।
Skin Fungal Infection के 6 सबसे Common Types
अधिकांश Skin Fungal Infection गर्मी नमी और पसीने की वजह से होता है। अक्सर देखा गया है कि Skin का फंगल इन्फेक्शन तब होता है, जब हवा या मिट्टी में मौजूद छोटे-छोटे कीटाणु या जिन्हे बोलचाल की भाषा में फंगस कहते है, हमारी स्किन पर घर बना लेते हैं।
क्या सभी Fungal Infection एक जैसे होते हैं?
यदि हम Fungal Infection की सही पहचान करना चाहते है तो, यह जानना जरुरी है कि Skin Fungal Infection क्या हैं? सभी फंगल इन्फेक्शन एक जैसे होते है? तो इसका जवाब होगा नहीं, सभी Skin Fungal Infection एक जैसे नहीं होते हैं। क्योंकि कवक इन्फेक्शन विभिन्न प्रकार के फंगस के कारण शरीर के अलग-अलग हिस्सों में होते हैं। इनके लक्षण, गंभीरता और इलाज का तरीका भी एक-दूसरे से काफी अलग होता है।
फंगल इन्फेक्शन को पहचानने के लिए उनकी गंभीरता और होने वाले स्थानों के आधार पर इन्हे बांटा गया है-

| फंगल इन्फेक्शन का प्रकार | प्रभावित हिस्सा | मुख्य लक्षण |
|---|---|---|
| Superficial Fungal Infection | त्वचा, बाल और नाखून | खुजली, लाल चकत्ते, त्वचा छिलना |
| Ringworm | शरीर, हाथ, पैर, चेहरा | गोल लाल चकत्ते और खुजली |
| Athlete’s Foot | पैरों की उंगलियों के बीच | त्वचा फटना, छिलना और जलन |
| Jock Itch | जांघ और ग्रोइन | तेज खुजली और लाल रैश |
| Nail Fungus | हाथ या पैर के नाखून | नाखून मोटे, पीले और टूटने लगना |
| Scalp Fungus | सिर की त्वचा | बाल झड़ना और पपड़ी बनना |
| Candida Infection | स्किन फोल्ड्स | लालपन, जलन और खुजली |
1. Superficial Fungal Infections : यह शरीर के बाहरी हिस्से पर होने वाला सबसे आम इन्फेक्शन हैं जो स्किन, बाल और नाखूनों की बाहरी लेयर में सबसे ज्यादा दिखाई देता हैं।
- दाद : दाद सबसे ज्यादा आम इन्फेक्शन है जिसका होना बहुत ही कॉमन माना जाता है इसमें सबसे पहले स्किन पर लाल, गोल और खुजलीदार चकत्ते बनने शुरू होते है। यह शरीर, चेहरे या सिर पर हो सकता है।
- एथलीट फुट : एथलीट फूट के नाम से ही साफ होता है की ऐसा इन्फेक्शन जो ज्यादातर पैरों की उंगलियों के बीच की स्किन को प्रभावित करता है, जिससे पैरों की स्किन फटने और छिलने लगती है।
- जॉक इच : यह जांघों और गुप्त अंगों के आसपास के नम हिस्सों में अधिकांश होता है और इसमें बहुत ज्यादा तेज खुजली होती है।
- नाखूनों का इन्फेक्शन: इस इन्फेक्शन में पैर या हाथ के नाखून मोटे, पीले या बेजान होकर टूटने लगते हैं।
2. यीस्ट इन्फेक्शन : यह कैंडिडा नामक फंगस के बहुत ज्यादा रूप से बढ़ने के कारण होता है, जो आमतौर पर हमारे शरीर में पहले से मौजूद होता है।
- ओरल थ्रश : इस इन्फेक्शन में मुंह और जीभ के अंदर सफेद रंग की लेयर जम जाती है ।
- वजाइनल यीस्ट इन्फेक्शन : इस इन्फेक्शन को अधिकांश महिलाओं में देखा गया है जिससे निजी अंगो में तेज खुजली, जलन और सफेद गाढ़ा स्राव होने लगता है।
3. गंभीर और आंतरिक फंगल इन्फेक्शन : यह फंगस शरीर के आंतरिक अंगों जैसे फेफड़े, रक्त और मस्तिष्क को डैमेज करना शुरू कर देते हैं। साथ ही यह यह इन्फेक्शन कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में जैसे डायबिटीज या कैंसर के मरीज में ज्यादातर होते है लेकिन ये इन्फेक्शन जानलेवा हो सकते हैं।
- एस्परजिलोसिस : इन इन्फेक्शन्स में सबसे पहले फेफड़े प्रभावित होते है ।
- म्यूकोर्मिकोसिस : नाक, आंखों और दिमाग को नुकसान पहुँचाने वाला बेहद गंभीर इन्फेक्शन है। यह सीधा दिमाग की नसों को प्रभावित करता है।
शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अलग नाम क्यों होते हैं?
Skin Fungal Infection को लेकर हमारे दिमाग में कई तरह के सवाल होते है कि जब इन्फेक्शन है तो एक ही इलाज क्यों नहीं, इन्फेक्शन के लिए अलग अलग इलाज क्यों? वही ज्यादातर लोगो के दिमाग में रहता है कि इन्फेक्शन को बांटा क्यों गया तो इसका सीधा और सरल जवाब है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले एक ही तरह के फंगल इन्फेक्शन के नाम अलग-अलग इसलिए होते हैं क्योंकि वे शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित करते हैं।
चिकित्सा विज्ञान में इनका नाम उस स्थान के आधार पर रखा गया है जहाँ इन्फेक्शन होता है। अधिकांश स्किन के फंगल इन्फेक्शन डर्माटोफाइट नामक फंगस के कारण होते हैं, लेकिन शरीर के हिस्से के अनुसार इनके नाम बदल जाते हैं।
| शरीर का हिस्सा | फंगल इन्फेक्शन का नाम |
|---|---|
| धड़, हाथ और पैर | टिनिया कॉर्पोरिस |
| जांघ और ग्रोइन | टिनिया क्रूरिस – जिसे आम भाषा में जॉक इच भी कहते हैं। |
| सिर की त्वचा | टिनिया कैपिटिस |
| पैर, विशेषकर उंगलियों के बीच | टिनिया पेडिस – जिसे एथलीट्स फुट कहा जाता है। |
| हाथ | टिनिया मैनुअम |
| नाखून | टिनिया अनगुइयम या ओनिकोमाइकोसिस |
| चेहरा | टिनिया फेसीआई |
क्या फंगस अलग-अलग होता है?
ऐसा बिल्कुल भी ज़रूरी नहीं होता है, क्योंकि कई मामलों में एक ही प्रकार का फंगस शरीर के अलग-अलग हिस्सों में इन्फेक्शन कर देता है। इसमें हम इस बात से अंतर समझ सकते है कि वह इन्फेक्शन शरीर के किस हिस्से में और कहाँ हुआ है। इसलिए डॉक्टर सही इलाज चुनने के लिए स्थान के आधार पर अलग नाम का उपयोग करते हैं।
अलग नाम रखने का क्या फायदा है?
अब सबसे अहम सवाल है कि इन्फेक्शन्स के अलग नाम रखने के क्या फायदे तो हम कह सकते है कि पहचान करके सही इलाज चुनना आसान हो जाता है जैसे उदाहरण के लिए-
- इन्फेक्शन शरीर के किस हिस्से में हुआ है।
- कौन-सी दवा या क्रीम अधिक प्रभावी होगी।
- उपचार कितने समय तक करना होगा।
- इन्फेक्शन फैलने की संभावना कितनी है और किन सावधानियों को बरतना आवश्यक होगा ।
इस प्रकार अलग नाम होने का मतलब यह नहीं है कि हर बार फंगस अलग है, बल्कि Skin Fungal Infection शरीर के किस हिस्से में हुआ है, यह जानना आवश्यक है। यही कारण है कि एक ही प्रकार के फंगल इन्फेक्शन को अलग-अलग स्थानों के आधार पर अलग-अलग चिकित्सीय नाम दिए जाते हैं।
कौन सा फंगल इन्फेक्शन सबसे ज्यादा देखा जाता है ?
स्किन फंगल इन्फेक्शन व्यक्ति की उम्र, मौसम और जिस तरह से भी वह जीवनयापन करता है उस पर डिपेंड करता है, लेकिन भारत देश की बात करें तो यह गर्म और आर्द्र देशों की श्रेणी में आता है तो इसमें अधिकतर टिनिया क्रूरिस और टिनिया कॉर्पोरिस जैसे फंगल इन्फेक्शन ज़्यादातर देखने को मिलते हैं।

1. टिनिया क्रूरिस– सबसे ज्यादा और सबसे अधिक होने वाला इन्फेक्शन है, यह जांघों के अंदरूनी हिस्से में होता है। इसे आम भाषा में जॉक इच के नाम से भी जाना जाता है। यह गर्मी, पसीना, टाइट कपड़े और लंबे समय तक नमी रहने से होता है। यदि लिंग के अनुसार बात करें तो यह पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक होता है।
2. टिनिया कॉर्पोरिस– यह शरीर के किसी भी हिस्से जैसे हाथ, पैर, पीठ, पेट या गर्दन पर हो सकता है। इसके लक्षणों की बात करें तो सबसे पहले इसमें अक्सर गोल या छल्ले जैसे लाल चकत्ते दिखाई देते हैं। इसे बोलचाल की भाषा में दाद के नाम से भी लोग जानते हैं।
Ringworm क्या है?
Ringworm जिसे आमतौर पर बोलचाल की भाषा में दाद भी कहा जाता है, यह स्किन पर होने वाला एक फंगल इन्फेक्शन है। यह डर्मेटोफाइट्स नामक फंगस के कारण ज्यादातर होता है। NHS के अनुसार Ringworm एक सामान्य फंगल इन्फेक्शन है, जो स्किन के सीधे संपर्क या इन्फेक्टेड वस्तुओं के द्वारा फैल सकता है। इस इन्फेक्शन में स्किन पर लाल या भूरे रंग के गोले के आकार के छल्ले जैसे चकत्ते दिखाई देते हैं।
Ringworm क्यों कहते है?
जब कभी Ringworm सुनते है तो सबसे पहले दिमाग में आता है की worm यानी कीड़ा मतलब दाद (Ringworm) किसी कीड़े की वजह से होता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है, इस बीमारी का नाम Ringworm इसलिए पड़ा क्योंकि इसके दाने अक्सर गोल रिंग आकार के दिखाई देते हैं, जिनका किनारा लाल और उभरा हुआ होता है, जबकि बीच का हिस्सा देखने में साफ होता है। और पुराने समय में लोगों को लगता था कि स्किन के अंदर कोई कीड़ा घूम रहा है, इसलिए इसका नाम Ringworm पड़ गया। लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि दाद फंगस के कारण होता है और Ringworm सिर्फ इसका पारंपरिक अंग्रेज़ी नाम है।
Ringworm को कैसे पहचानें?
बता दें कि यह बहुत ही कॉमन Skin Fungal Infection और ज्यादातर गर्मी और पसीने की वजह से होता है। Ringworm को पहचानने का सबसे सरल तरीका यह है कि इसमें स्किन पर गोलाकार या छल्ले जैसा लाल चकत्ता दिखाई देता है। जब इसकी शुरुआत होती है तो यह एक छोटे, लाल और पपड़ीदार धब्बे जैसा दिखता है, लेकिन बाद में धीरे-धीरे बाहर की तरफ फैलना शुरू हो जाता है, शरीर के अलग-अलग हिस्सों के आधार पर इसे पहचानने के ओर भी सरल तरीके हैं-
1. सामान्य स्किन पर (हाथ, पैर, पेट या पीठ): जब कभी आपको स्किन पर यह इन्फेक्शन होगा तो स्किन पर चकत्ते के किनारे उभरे हुए, खुरदरे और लाल या गहरे रंग के दिखाई देंगे, साथ ही इसके बीच की स्किन लगभग सामान्य और साफ दिखाई देगी। इन्फेक्टेड स्किन पर लगातार तेज खुजली और जलन महसूस होने लगती है।
2. सिर की त्वचा पर: सिर पर गोल, पपड़ीदार और लाल निशान बन जाते हैं जहाँ से बाल पूरी तरह टूट जाते हैं या कमजोर होकर झड़ने लगते है, टूटे हुए बालों की जगह स्किन पर छोटे-छोटे काले बिंदु दिखाई देते हैं।
3. उंगलियों और पैरों के बीच: जब स्किन फंगल इन्फेक्शन पैरों की उंगलियों के बीच होता है तो वंहा की स्किन सफेद, मुलायम, कटी-फटी या छिलने लगती है और हल्का हल्का दर्द महसूस होने लगता है।
4. जांघों और गुप्त अंगों के पास: इस इन्फेक्शन को बोलचाल की भाषा में Jock Itch के नाम से भी जाना जाता है इसमें लाल-भूरा रंग की बॉर्डर बनना शुरू हो जाती है, जांघों के जोड़ों में उभरे हुए किनारों वाला लाल या कत्थई रंग का रैश बनता दिखाई देता है, और जिस भी शरीर के हिस्से में यह होता है वहां पर बहुत ज्यादा खुजली होती है।
5. नाखूनों में: नाखून में इन्फेक्शन होने का सीधा सा मतलब है नाखून का मोटा होना, बेजान होना और पीले या सफेद होना, इसमें नाखून के किनारें भुरभुराकर टूटने लगते हैं।

Ringworm के प्रमुख लक्षण
- गोलाकार चकत्ते: जिस भी सतह या स्किन पर होगा वहां के हिस्से पर गोले के आकार के निशान बन जाते है।
- तेज खुजली: चकत्तों वाले हिस्से पर खुजली या जलन होने लगती है ।
- उभरे हुए किनारे: स्किन की परत का गोले के,आकार में उभरना और लाल पपड़ीदार दिखाई देना।
- साफ स्किन सेंटर : गोले के बीच की स्किन का आमतौर पर नॉर्मल या साफ दिखाई देना।
दाद कैसे फैलता है?
दाद के फैलने के कई कारण होते है लेकिन यह आमतौर पर फंगस के कारण होता है क्योंकि गर्म और नम मौसम में यह आसानी से और तेजी से पनपते हैं। यह इन्फेक्टेड व्यक्ति की स्किन के सीधे संपर्क में आने से भी तेजी से फैलता है। जैसे किसी इन्फेक्टेड व्यक्ति के तौलिए, कपड़े, कंघी या बिस्तर के सम्पर्क में आते है तो दाद होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
संक्रमित पालतू जानवरों जैसे बिल्ली या कुत्ते को छूने से, पसीने, नमी के मौसम में टाइट कपड़े पहनने या लंबे समय तक पसीना जमा होने से भी दाद होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
Athlete’s Foot क्या है?
Athlete’s Foot यानी इसके नाम से ही साफ पता चलता है, पैरों में होने वाला एक संक्रामक फंगल इन्फेक्शन, जिसे मेडिकल भाषा में टिनिया पेडिस के नाम से भी जाना जाता है। यह डर्मेटोफाइट्स नामक फंगस के कारण होता है, और इस तरह का इन्फेक्शन खिलाड़ियों में होना बहुत आम बात है।
Athlete’s Foot का ज्यादातर पैरों में होने के करण होते है जैसे-
- अधिक पसीना और नमी: पैर सबसे नमी के वातावण में होते है साथ ही पैरों में सबसे ज्यादा पसीने की ग्रंथियां होती हैं, जिससे उंगलियों के बीच हमेशा गीलापन रहता है।
- जूतें पहनना: जूतें के अंदर यह इन्फेक्शन अधिकतर इसलिए भी होता है क्योंकि फंगस की पसंदीदा चीजें जैसे अंधेरा, गर्मी और नमी एक साथ उसे मिलती हैं। और फंगस का भोजन जैसे पैरों की मोटी स्किन में केराटिन प्रोटीन सबसे ज्यादा होता है, जिसे खाकर फंगस जिंदा रहता है। साथ ही जमीन से सीधा संपर्क मतलब सार्वजनिक शावर, पूल या बाथरूम के फर्श पर मौजूद फंगस के संपर्क में सबसे पहले पैर ही आते हैं।

Athlete’s Foot में पैरों को साफ और सूखा रखना सबसे जरूरी होता है। इसके साथ डॉक्टर द्वारा सुझाई गई एंटीफंगल क्रीम का उपयोग किया जाता है। कुछ लोग हर्बल इंग्रेडिएंट्स वाली Leebord Anti-Fungal Cream को भी अपनी Skin Care Routine का हिस्सा बनाना पसंद करते हैं।
Jock Itch क्या है?
Jock Itch जांघों के जोड़ों, नितंबों और भीतरी जांघों में होने वाला एक संक्रामक फंगल इन्फेक्शन है, जिसे मेडिकल भाषा में टिनिया क्रूरिस के नाम से भी जाना जाता है, जिस फंगस से दाद होता है इसका फंगस भी डर्मेटोफाइट्स है जो एथलीट फुट भी पैदा करता है, शरीर के जिस भी हिस्से में नमी पसीना जमा रहने के कारण यह इन्फेक्शन तेजी से पनपता है।
Jock Itch के मुख्य लक्षण-
इस इन्फेक्शन के लक्षणों में सबसे पहले दिखाई देने वाला लक्षण जांघों के बीच की त्वचा पर लाल, उभरे हुए किनारें पर छल्लेदार चकत्ता बन जाता है, प्रभावित हिस्से पर हर समय तेज खुजली, जलन और रगड़ महसूस होने लगती है, साथ ही इन्फेक्शन बढ़ने पर स्किन पपड़ीदार होकर छिलने लगती है और ठीक होने के दौरान या पुराना होने पर यह हिस्सा भूरा या गहरा दिखाई देने लगता है।

Jock Itch इन्फेक्शन महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज्यादा क्यों होता है?
यह जानकार आपको हैरानी होगी कि यह इन्फेक्शन पुरुषों में ज्यादातर होता है इसके कुछ कारण है जैसे-
- शारीरिक बनावट : पुरुषों के शारीरिक अंडकोष और जांघों के बीच लगातार स्किन का संपर्क रहता है। इस घर्षण और त्वचा-पर-त्वचा के जुड़ाव के कारण वहां गर्मी और नमी अन्य हिस्सों से कहीं अधिक जमा होती है।
- अधिक पसीना : पुरुषों के शरीर में महिलाओं के मुकाबले पसीने की ग्रंथियां आमतौर पर अधिक एक्टिव होती हैं। साथ ही यदि शारीरिक काम की बात करें तो जिम या दौड़-भाग के दौरान पुरुषों के ग्रॉइन एरिया में बहुत जल्दी और ज्यादा पसीना आता है।
- तंग और सिंथेटिक अंडरवियर: कई पुरुष बहुत टाइट या सिंथेटिक मटेरियल जैसे नायलॉन या पॉलिएस्टर के एथलेटिक सपोर्टर और अंडरवियर पहनते हैं। यह कपड़ा पसीने को सोखने के बजाय नमी को अंदर ही ब्लॉक कर देता है।
- लापरवाही या हाइजीन: जिम या भारी काम के बाद तुरंत नहाकर कपड़े नहीं बदलना, पसीने से भीगे कपड़ों में ही घंटों बैठे रहना जैसी आदतें पुरुषों में इस इन्फेक्शन को तेजी से बढ़ाती है।
Nail Fungus क्या है?
Nail Fungus एक आम इन्फेक्शन है जो किसी भी व्यक्ति में देखा जा सकता है, इसमें नाखून बेजान और खराब होने लगते है, इसे मेडिकल भाषा में ओनिकोमाइकोसिस के नाम से भी जाता है। यह आमतौर पर पैर के अंगूठे के नाखून से शुरू होता है, लेकिन इसका इन्फेक्शन हाथों के नाखूनों में भी फैल सकता है।
Nail Fungus पहचानें कैसे?

सबसे अहम सवाल कि यदि इस तरह का इन्फेक्शन हो रहा है तो इसे पहचानें कैसे? तो आपको बता दें की इस इन्फेक्शन में सबसे पहले नाखूनों का रंग बदलने लगता है।
आपको नाखून का रंग पीला, सफेद, भूरा या काला दिखाई देने लगेगा साथ ही इन्फेक्टेड नाखून नॉर्मल से बहुत ज्यादा मोटा हो जाता है और नाखून के किनारे कमजोर होकर भुरभुराकर टूटने लगते हैं नाखून का आकार मतलब नाखून का नेचुरल शेप खराब हो जाता है और वह अपनी सतह से अलग होने लगता है। कभी कभी जब इन्फेक्शन गंभीर हो जाता है तो नाखून दबाने पर दर्द होता है और उसके आसपास से अजीब बदबू आने लगती है।
Scalp Fungus क्या है?
Scalp Fungus अधिकांश सिर की स्किन पर फंगस के कारण होता है इसको मेडिकल भाषा में टिनिया कैपिटिस भी कहा जाता है, इसके लक्षणों की बात करें तो सबसे पहले इसमें बालों की जड़ और खोपड़ी की त्वचा प्रभावित होती है।
Scalp Fungus में बाल क्यों झड़ने लगते हैं?
इस Skin Fungal Infection में बाल झड़ने का कारण यह है की इसमें फंगस बालो की जड़ों पर हमला करता है और बाहरी लेयर और जड़ों के केराटिन प्रोटीन को खाकर उन्हें कमजोर कर देता है।
- बालों का टूटना: फंगस के कारण जड़ें इतनी कमजोर हो जाती हैं कि बाल स्किन की लेयर से टूट जाते हैं, जिससे वहां छोटे काले बिंदु दिखाई देने लगते हैं।
- गंभीर सूजन: इन्फेक्शन के कारण स्कैल्प में तेज सूजन होने लगती है, जो बालों को अपनी जगह पर टिकाए रखने की क्षमता को खत्म कर देती है।
- केरियन बनना: गंभीर मामलों में सिर पर मवाद से भरे दर्दनाक उभार बन जाते हैं, जो उस हिस्से के बालों को हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं।
Scalp Fungus बच्चों में ज्यादा क्यों होता है?

- कमजोर इम्यून सिस्टम: बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में कम होती है, बच्चों में उतनी मजबूती नहीं होती, जिससे फंगस आसानी से हमला कर देता है।
- कम सीबम का बनना: वयस्कों के स्कैल्प में निकलने वाले नेचुरल ऑयल में एंटीफंगल फैटी एसिड होते हैं, किशोरावस्था से पहले बच्चों के सिर में यह ऑयल बहुत कम बनता है, जिससे उन्हें सुरक्षा नहीं मिल पाती।
- स्कूल और खेलकूद में संपर्क: बच्चे बीमारियों के बारे में जयादा नहीं जानते या कह सकते है कि जागरूक नहीं होते, इसलिए वे स्कूल, डे-केयर या खेलते समय एक-दूसरे के बहुत करीब आ जाते हैं। यदि किसी बच्चे को Scalp Fungus हो, तो उसके सीधे संपर्क में आने या कंघी, टोपी, तौलिया जैसी चीज़ें शेयर करने से यह इन्फेक्शन आसानी से दूसरे बच्चों तक फैल सकता है।
कैंडिडा क्या है ?
कैंडिडा एक प्रकार का यीस्ट होता है, MSD Manual के अनुसार कैंडिडा हमारे शरीर में ही पाया जाता है यह स्किन, मुंह, पेट और योनि में सामान्य रूप से बहुत कम मात्रा में होता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यदि बैलेंस्ड रहती है, तो यह किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाता।
लेकिन जब शरीर का इम्युन सिस्टम ठीक से काम नहीं करता है तो यह अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है और फंगल इन्फेक्शन का रूप ले लेता है।
कैंडिडा Skin Fold में ही क्यों होता है?

कैंडिडा फंगस पहले से ही हमारे शरीर में पाया जाता है लेकिन जैसे ही इसे पनपने के लिए इसके अनुरूप परिस्थितियां मिलती है, तो यह आसानी से फैल जाता है और स्किन फोल्ड्स में नमी और पसीना होता है जिस वजह से यह जल्दी हो जाता है जैसे बगल, स्तनों के नीचे, जांघों के बीच, और पेट की परतों के बीच। इन हिस्सों पर हवा नहीं लगने के कारण यहां की नमी सूख नहीं पाती और फंगस ऐसी जगह पर जल्दी पनप जाता है।
साथ ही स्किन फोल्ड्स में स्किन लगातार एक-दूसरे से रगड़ खाती है, इस घर्षण के कारण स्किन का सुरक्षा कवच यानी ऊपरी लेयर छिल जाती है, जिससे फंगस को स्किन के अंदर घुसने का रास्ता मिल जाता है।
किन लोगों को Skin Fungal Infection होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?
- Athletes (खिलाड़ी): यह इन्फेक्शन ज्यादातर उन लोगो में देखा गया है जो लोग नियमित रूप से जिम जाते हैं या खेलकूद करते हैं, क्योंकि उन्हें अधिक पसीना आता है। और पसीना लंबे समय तक शरीर पर बना रहता है पसीने से भीगे कपड़े होने के कारण फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।
- Diabetes (मधुमेह के मरीज): अक्सर देखा गया है कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। साथ ही स्किन की सिलवटों और नमी वाले हिस्सों में फंगस के बढ़ने की संभावना अधिक रहती है, इसलिए इन्हें विशेष सावधानी रखना चाहिए।
- Obesity (मोटापा): जिन लोगों का वजन अधिक होता है, उनकी स्किन की सिलवटों में पसीना और नमी ज्यादा जमा होती है। यह वातावरण फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल होता है, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
- Pregnancy (गर्भावस्था): गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव और शरीर में होने वाले शारीरिक परिवर्तन त्वचा को अधिक संवेदनशील बना देते हैं। अधिक पसीना आने और नमी में रहने के कारण कुछ महिलाओं में फंगल इन्फेक्शन की संभावना बढ़ जाती है।
- Children (बच्चे): बच्चे स्कूल, डे-केयर और खेलकूद के दौरान एक-दूसरे के बहुत करीब रहते हैं। वे अक्सर साफ-सफाई का पूरा ध्यान नहीं रख पाते, जिससे फंगल इन्फेक्शन फैलने का रिस्क रहता है।
- Elderly (बुजुर्ग): बता दें कि उम्र बढ़ने के साथ त्वचा पतली और संवेदनशील हो जाती है तथा इम्यून सिस्टम की कैपेसिटी कम हो जाती है। यदि व्यक्तिगत स्वच्छता और त्वचा की देखभाल ठीक से नहीं की जाती है, तो फंगल इन्फेक्शन होने की संभावना रहती है।
- Weak Immunity (कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता): जिन लोगों की इम्यूनिटी किसी बीमारी, कुछ दवाओं या अन्य कारणों से कमजोर हो जाती है, उनका शरीर फंगस से लड़ नहीं पाता। इसलिए जिन लोगो की इम्युनिटी कमजोर होती है उन्हें फंगल इन्फेक्शन बहुत आसानी से हो जाता है।
Skin Fungal Infection की जांच कैसे होती है?
किसी भी प्रकार के Skin Fungal Infection का पता लगाने के लिए सबसे पहले डॉक्टर स्किन की अच्छी तरह जांच करते हैं। क्योंकि कई मामलों में केवल लक्षण देखकर ही बीमारी की पहचान हो जाती है, लेकिन यदि इन्फेक्शन बार-बार हो रहा है, या फिर लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है तो कुछ जांचें कराने की सलाह दी जा सकती है।
Dermatologist कैसे पहचानते हैं?
Dermatologist सबसे पहले Skin Fungal Infection में स्किन के प्रभावित हिस्से को ध्यान से देखते हैं। यदि स्किन पर खुजली, लालपन, गोल या छल्ले जैसे दाग, त्वचा का छिलना और इन्फेक्शन जैसे अन्य लक्षण दिखाई दे रहे है तो डॉक्टर मरीज से लक्षण कब शुरू हुए, पहले कौन-सी दवा यूज़ करते थे इन सबकी जानकारी लेते है ताकि मरीज की हिस्ट्री देख पाएं और परिवार में किसी और को भी ऐसी समस्या है, जैसे सवाल भी पूछते हैं।
- हल्के और शुरुआती Skin Fungal Infection में डॉक्टर अक्सर प्रभावित हिस्से पर एंटीफंगल क्रीम लगाने की सलाह देते हैं। यदि आप हर्बल इंग्रेडिएंट्स वाली क्रीम की का यूज़ करते हैं, तो Leebord Anti-Fungal Cream एक विकल्प हो सकती है।

KOH Test: KOH Test फंगल इन्फेक्शन का पता लगाने के लिए सबसे सामान्य टेस्ट में से एक है। इसमें प्रभावित स्किन से हल्की-सी स्क्रैपिंग लेकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। यदि उसमें फंगस के धागेनुमा तत्व दिखाई देते हैं, तो साफ पता चल जाता है फंगल इन्फेक्शन है। यह जांच जल्दी पूरी हो जाती है और आमतौर पर दर्द भी नहीं होता है।
Wood’s Lamp Test: Wood’s Lamp एक विशेष प्रकार की पराबैंगनी रोशनी होती है, जिसकी मदद से डॉक्टर कुछ प्रकार के स्किन संक्रमणों की जांच करते हैं। लेकिन सभी प्रकार के फंगल इन्फेक्शन इस जांच में नहीं दिखते, लेकिन कुछ विशेष संक्रमणों में त्वचा अलग रंग या चमक के साथ दिखाई दे सकती है, जिससे डॉक्टर को सही पहचान करने में मदद मिलती है।
Skin Culture: यदि इन्फेक्शन बार-बार हो रहा है, इलाज के बाद भी ठीक न हो रहा है या यह पता लगाना जरूरी होता है कि कौन-से फंगस की वजह से इन्फेक्शन हुआ है, तो इसलिए Skin Culture कराया जाता है। इसमें त्वचा का छोटा नमूना लैब में भेजा जाता है, जहां फंगस को बढ़ाकर उसकी पहचान की जाती है। इस जांच में रिपोर्ट आने में कुछ दिन या कभी-कभी कुछ सप्ताह भी लग सकते हैं।
Biopsy कब की जाती है?
Skin Biopsy की जरूरत बहुत कम मामलों में पड़ती है। यदि डॉक्टर को शक होता है कि फंगल इन्फेक्शन नहीं बल्कि कोई दूसरी गंभीर स्किन की बीमारी हो सकती है, तो ऐसे मामलों में प्रभावित स्किन का बहुत छोटा नमूना लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। इससे सही कारण का पता लगाने और उचित इलाज देने में मदद मिलती है।
Skin Fungal Infection से बचाव के आसान तरीके
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| त्वचा को साफ और सूखा रखें | गीले कपड़े लंबे समय तक न पहनें |
| रोज़ नहाएं | तौलिया और कपड़े साझा न करें |
| सूती कपड़े पहनें | बहुत टाइट कपड़े न पहनें |
| जूते और मोजे रोज़ बदलें | लंबे समय तक पसीना न रहने दें |
| डॉक्टर की सलाह अनुसार पूरा इलाज करें | खुजली कम होते ही दवा बंद न करें |
Conclusion
Skin Fungal Infection एक नॉर्मल समस्या है, लेकिन थोड़ी सी लापहरवाही इसको बढ़ा देती है, सही पहचान और सही जानकारी साथ ही सही समय पर इसका उपचार से कण्ट्रोल किया जा सकता है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि हर फंगल इन्फेक्शन एक जैसा नहीं होता। इसलिए बिना सही पहचान के किसी भी क्रीम या घरेलू नुस्खे का यूज़ करने के बजाय स्किन के डॉक्टर से सलाह लेना अधिक उचित होता है।
शरीर के किसी भी हिस्से पर यदि खुजली, लालपन, जलन, गोल चकत्ते या स्किन का छिलना लंबे समय तक बना रहे या बार-बार वापस आए, तो इसे बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।साथ ही व्यक्तिगत स्वच्छता, स्किन को सूखा रखना, तौलिया और कपड़े किसी भी अन्य व्यक्ति से शेयर नहीं करना तथा समय पर उचित इलाज लेना फंगल इन्फेक्शन से बचाव का सबसे अच्छा और सबसे सरल तरीका हैं।
याद रखें, Skin Fungal Infection जितना जल्दी पहचाना जाता है, उसका इलाज उतना ही आसान होता है। इसलिए खुजली, लालपन या गोल चकत्तों को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर सही पहचान, विशेषज्ञ की सलाह और उचित उपचार ही स्वस्थ स्किन की सबसे बड़ी कुंजी है।
Medical Disclaimer
इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य शैक्षणिक और जागरूकता के उद्देश्य से प्रदान की गई है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। Skin Fungal Infection के लक्षण, कारण और उपचार व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
यदि आपको लगातार खुजली, लाल चकत्ते, जलन, दर्द, सूजन, मवाद, बुखार या फंगल इन्फेक्शन से संबंधित कोई भी गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य Dermatologist से परामर्श अवश्य लें। किसी भी एंटी-फंगल क्रीम, दवा या उपचार का उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह या उत्पाद के निर्देशों के अनुसार ही करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या Skin Fungal Infection अपने आप ठीक हो सकता है?
नहीं, अधिकतर मामलों में सही इलाज की आवश्यकता होती है।
2. क्या हर खुजली फंगल इन्फेक्शन होती है?
नहीं, यह एलर्जी या अन्य त्वचा रोग भी हो सकते हैं।
3. Skin Fungal Infection कैसे फैलता है?
संक्रमित व्यक्ति, तौलिया, कपड़े, पसीने और नमी के संपर्क से।
4. क्या यह बार-बार हो सकता है?
हाँ, अधूरा इलाज और खराब स्वच्छता के कारण।
5. इससे बचाव कैसे करें?
त्वचा को साफ और सूखा रखें, तौलिया व कपड़े साझा न करें।
6. किन लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है?
डायबिटीज, मोटापा, कमजोर इम्यूनिटी, खिलाड़ी, बच्चे और बुजुर्ग।
7. क्या क्रीम से इलाज हो सकता है?
हल्के मामलों में डॉक्टर एंटीफंगल क्रीम की सलाह दे सकते हैं। हर्बल विकल्प के रूप में Leebord Anti-Fungal Cream पर भी डॉक्टर की सलाह अनुसार विचार किया जा सकता है।
8. क्या घरेलू नुस्खे पर्याप्त हैं?
नहीं, लगातार लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
9. इसकी जांच कैसे होती है?
डॉक्टर जांच के साथ KOH Test, Wood’s Lamp या Skin Culture करा सकते हैं।
10. डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
यदि खुजली, लालपन या दाद 1–2 सप्ताह तक ठीक न हो या बार-बार लौट आए।

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