महिलाओं में फंगल इंफेक्शन: 5 मुख्य कारण और 7 आसान तरीकों से पाएं शानदार राहत

महिलाओं में फंगल इंफेक्शन

Abstract

महिलाओं में फंगल इंफेक्शन, खासकर वैजाइनल यीस्ट इंफेक्शन, बेहद आम समस्या है। लगभग 75% महिलाएं जीवन में कम से कम एक बार इसका अनुभव करती हैं। हार्मोनल बदलाव, नमी, गर्भावस्था, डायबिटीज, टाइट कपड़े और कमजोर इम्यूनिटी इसके मुख्य कारण हैं। यह स्तनों के नीचे, जांघों के बीच, योनि, बगल और त्वचा की सिलवटों में हो सकता है। खुजली, लालपन, जलन और सफेद डिस्चार्ज इसके प्रमुख लक्षण हैं। सही जानकारी और छोटी-छोटी सावधानियों से इस समस्या को काफी हद तक रोका और ठीक किया जा सकता है।

Introduction:

हर महिला की जिंदगी जिम्मेदारियों से भरी होती है। काम, घर, परिवार इन सबके बीच वह अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती है। थकान और व्यस्तता के चलते शरीर में होने वाली छोटी-छोटी परेशानियां जैसे खुजली आम बात लगने लगती है। लेकिन यही खुजली कई बार फंगल इंफेक्शन का रूप ले लेती है। कई महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं, खुद ही क्रीम लगा लेती हैं या सोचती रह जाती हैं। मन में सवाल घूमने लगते हैं, क्या ये समस्या सिर्फ कुछ महिलाओं को होती है या ज्यादातर को? और सबसे बड़ी चिंता, ये बार-बार क्यों लौट आती है, जैसे कोई अनचाहा मेहमान जो जाने का नाम ही नहीं लेता?

सच्चाई ये है कि महिलाओं में योनि का फंगल इंफेक्शन यीस्ट इंफेक्शन या कैंडिडायसिस उतना ही आम है जितना गर्मी में पसीना। लगभग तीन-चौथाई महिलाएं अपने जीवन में कम से कम एक बार इसका सामना करती हैं। लेकिन हर खुजली फंगल नहीं होती। और जब ये बार-बार लौटती है, तो उसके पीछे कई छुपे हुए कारण होते हैं, एंटीबायोटिक, हार्मोन, डायबिटीज या रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें।

इस लेख में हम इन्हीं सवालों के जवाब खोजेंगे महिलाओं में ये इंफेक्शन इतना आम क्यों है? क्या हर खुजली फंगल इंफेक्शन की निशानी है? ये बार-बार क्यों होती है? आइए, इन सवालों के जवाब साथ मिलकर समझते हैं, ताकि अगली बार जब खुजली आए तो डरने के बजाय आप समझदारी से उसका सामना कर सकें।

फंगल इंफेक्शन क्या होता है?

फंगल इंफेक्शन होता क्या है यह जनाना बेहद जरुरी है ताकि हम सही पहचान करके सही इलाज ले सकें, फंगल इंफेक्शन को सरल शब्दों में समझे तो यह बीमारी फंगस के शरीर में बढ़ने या अत्यधिक वृद्धि से होती है। फंगस हमारे आसपास हवा, मिट्टी, पानी और शरीर पर भी मौजूद होते हैं। ज्यादातर फंगस हमे किसी प्रकार का नुक्सान नहीं पहुंचाते हैं, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में वे इन्फेक्शन पैदा कर देते हैं।

जब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो, एंटीबायोटिक लेने से अच्छे बैक्टीरिया खत्म हो जाएं, नमी और गर्मी ज्यादा हो, या हार्मोन में बदलाव हो, तब फंगस तेजी से बढ़ने लगता है। यह संक्रमण स्किन, नाखून, बाल, मुंह, योनि या फेफड़ों में हो सकता है। सामान्य फंगल इंफेक्शन हल्के होते हैं जैसे दाद, एथलीट फुट या यीस्ट इंफेक्शन। ये खुजली, लाल चकत्ते, सफेद डिस्चार्ज या जलन पैदा करते हैं। गंभीर मामलों में खासकर कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में फंगस खून या आंतरिक अंगों तक पहुंच सकता है, जो जानलेवा हो सकता है। इसलिए समस्या से पहले सतर्कता जरुरी है।

types of fungal infection

फंगस क्या है?

फंगस एक जीवित जीव है जिसकी एक अलग श्रेणी है। इसमें यीस्ट, मोल्ड, मशरूम और मिल्ड्यू शामिल हैं। ये बीजाणु से फैलते हैं और ज्यादातर नमी वाली जगहों पर पनपते हैं। शरीर में कुछ फंगस जैसे कैंडिडा सामान्य रूप से पहले से ही रहते हैं, लेकिन यदि इम्यून सिस्टम बिगड़ता है तो यही हमारे लिए समस्या का कारण बन जाते हैं।

इन्फेक्शन जो ज्यादातर महिलाओं में अधिक देखे जाते हैं?

वैजाइनल यीस्ट इंफेक्शन वुल्वोवैजिनल कैंडिडायसिस: यह इन्फेक्शन सबसे आम, लगभग 75% महिलाओं को जीवन में एक बार होता है।

स्किन फंगल इंफेक्शन: यह तो आमतौर पर सभी ने महसूस किया होगा क्योंकि दाद (रिंगवर्म), टिनिया क्रूरिस (ग्रोइन में), कैंडिडल इंटरट्रिगो ये इन्फेक्शन बहुत कॉमन है, साथ ही नेल फंगल इंफेक्शन और कभी-कभी ओरल थ्रश भी महिलाओं में देखा गया है।

स्किन फंगल इंफेक्शन और वैजाइनल यीस्ट इंफेक्शन में अंतर

पहलू स्किन फंगल इंफेक्शन वैजाइनल यीस्ट इंफेक्शन
मुख्य कारण डर्मेटोफाइट्स या कैंडिडा मुख्यतः कैंडिडा एल्बिकन्स
जगह त्वचा, पैर, ग्रोइन, नाखून योनि और वुल्वा
लक्षण गोलाकार चकत्ते, खुजली, पपड़ी तीव्र खुजली, जलन, गाढ़ा सफेद डिस्चार्ज
फैलने का तरीका संपर्क, नमी, सार्वजनिक जगहें शरीर के अंदर असंतुलन (एंटीबायोटिक आदि)
इलाज ज्यादातर टॉपिकल क्रीम क्रीम + मौखिक एंटीफंगल

Women में Fungal Infection ज्यादा क्यों होता है?

सच्चाई ये है कि महिलाओं में फंगल इंफेक्शन पुरुषों से कहीं ज्यादा आम है। लगभग तीन-चौथाई महिलाएं अपने जीवन में कम से कम एक बार इसका सामना करती हैं। लेकिन क्यों?महिलाओं की जिंदगी में फंगल इंफेक्शन, खासकर वैजाइनल यीस्ट इंफेक्शन, एक बार-बार लौटने वाली कहानी की तरह है।

इसका सबसे बड़ा कारण है उनकी अस्त व्यस्त जिंदगी जिसमें वह दुसरो का ख्याल रखे रखे खुद का ख्याल रखना भूल जाती है लगभग 75 प्रतिशत महिलाएं अपने जीवन में कम से कम एक बार इसका सामना करती हैं, और कई महिलाओं में यह समस्या बार-बार आती है।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह कहीं ज्यादा आम क्यों है?

क्योंकि उनके शरीर में हार्मोन, नमी, जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी कई ऐसे कारक हैं जो फंगस खासकर कैंडिडा के लिए अनुकूल माहौल बना देते हैं। आइए इस पूरी फंगल इंफ्केशन को हानि और सरल भाषा में विस्तार से समझते हैं

हार्मोनल बदलाव

शरीर में कई तरह के हार्मोन्स पाए जाते है , लेकिन महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन एक बहुत ही शक्तिशाली लेकिन चंचल हार्मोन है। जब इसका लेवल बढ़ता है चाहे मासिक धर्म चक्र के दौरान या जन्म नियंत्रण गोलियां लेने से हो या अन्य हार्मोनल बदलाव से तो योनि की दीवारों में ग्लाइकोजन नाम का पदार्थ बढ़ जाता है।

ये ग्लाइकोजन कैंडिडा फंगस के लिए मीठा और पौष्टिक भोजन बन जाता है। फंगस इस भोजन को पाकर तेजी से बढ़ने लगता है, योनि के सामान्य बैलेंस को बिगाड़ देता है और इन्फेक्शन आसानी से अपनी जगह बना लेता है। यही वजह है कि प्रजनन आयु की महिलाओं में यह समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है। हार्मोन में उतार-चढ़ाव जितना ज्यादा होगा, फंगस को मौका उतना ही ज्यादा मिलेगा।

पीरियड्स के दौरान नमी

महिलाओं में ज्यादातर फंगल इन्फेक्शन तभी देखा गया है जब हर महीने मासिक धर्म शुरू होता है, तो शरीर में एक खास तरह की नमी और गर्माहट बढ़ जाती है। खून का प्रवाह, सैनिटरी पैड या टैम्पोन का लंबे समय तक उसे करना ये सब मिलकर योनि क्षेत्र को गर्म और नम बना देते हैं। फंगस ऐसे ही माहौल में सबसे तेजी से पनपता है।

कई महिलाएं बताती हैं कि पीरियड्स के ठीक पहले, दौरान या तुरंत बाद खुजली और जलन अचानक बढ़ जाती है। पैड को बार-बार न बदलना या लंबे समय तक एक ही पैड पहनना इस समस्या को और बढ़ा देता है। नमी और गर्मी दोनों मिलकर फंगस के लिए लगभग परफेक्ट माहौल बना देते है।

Pregnancy

जब महिलाओं में गर्भावस्था होती है, तो शरीर में सबसे बड़े हार्मोनल बदलाव का समय होता है। एस्ट्रोजन का लेवल बहुत ऊंचा हो जाता है, खासकर दूसरी और तीसरी तिमाही में। इससे योनि की दीवारों में ग्लाइकोजन और भी ज्यादा बढ़ जाता है, पीएच बैलेंस बदल जाता है जिससे अच्छे बैक्टीरिया कमजोर पड़ जाते हैं। और उसी के परिणाम के अनुसार, कैंडिडा को बढ़ने का पूरा मौका मिल जाता है। गर्भवती महिलाओं में यीस्ट इंफेक्शन सामान्य महिलाओं की तुलना में काफी ज्यादा आमतौर पर देखा गया है। कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पहली बार ये समस्या होती है, और कुछ को बार-बार परेशान करती है।

Menopause

मेनोपॉज में कहानी थोड़ी बदल जाती है। एस्ट्रोजन का लेवल कम होने से योनि की दीवारें पतली और सूखी पड़ने लगती हैं, जिससे फंगस का खतरा आमतौर पर घट जाता है। लेकिन अगर महिला हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी ले रही हो, या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हों, तो इन्फेक्शन की पुरानी समस्या फिर लौट सकती है। मेनोपॉज के बाद भी कुछ महिलाओं में स्किन फोल्ड्स या अन्य जगहों पर फंगल इंफेक्शन बना रहता है क्योंकि शरीर की नमी और इम्यूनिटी में बदलाव आ चुका होता है।

अधिक पसीना

फंगल इन्फेक्शन ज्यादातर शरीर में पसीने की वजह से होता है, लेकिन जब यह ज्यादा मात्रा में और लंबे समय तक शरीर में बना रहता है तो फंगस के लिए मनो स्वर्ग जैसा वातावरण बना देता है। गर्मी के मौसम में, व्यायाम के बाद या तनाव के कारण ज्यादा पसीना आने से योनि और आसपास के क्षेत्र में नमी बढ़ जाती है। ये नम और गर्म माहौल कैंडिडा को तेजी से बढ़ने का मौका देता है। जिन महिलाओं को ज्यादा पसीना आता हैं, उन्हें स्किन और वैजाइनल दोनों तरह के फंगल इंफेक्शन होने का अधिक खतरा रहता है।

Tight Jeans और Synthetic Underwear

फंगल इन्फेक्शन का कारण कपड़े भी होते है क्योंकि टाइट जीन्स और सिंथेटिक अंडरवियर ज्यादातर महिलाएं उसे करती हैं, लेकिन ये फंगस के सबसे बड़े दोस्त भी हैं। ये कपड़े हवा को अंदर नहीं आने देते, जिससे गर्मी और नमी शरीर पर बनी रहती है। सिंथेटिक के जो भी कपडे होते है वह पसीने को सोखने के बजाय उसे अंदर ही रखती है। और योनि क्षेत्र में एक बंद, गर्म और नम माहौल बन जाता है जहाँ फंगस आसानी से पनपने लगता है। लेकिन यदि ढीले और सूती कपड़े पहनने से ये समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना

गीले कपड़े लंबे समय तक पहनना फंगस को खुला निमंत्रण देने जैसा है। गीले कपड़े शरीर के तापमान को बढ़ाते हैं और नमी को बनाए रखते हैं। ये दोनों चीजें मिलकर फंगस के लिए आदर्श वातावरण तैयार कर देती हैं। कई महिलाओं को स्विमिंग या वर्कआउट के बाद अचानक खुजली शुरू हो जाती है, क्योंकि उन्होंने गीले कपड़े जल्दी नहीं बदले।

Diabetes

डायबिटीज वाले मरीजों में अक्सर फागल इन्फेक्शन जल्दी होते देखा गया है और यह इन मरीजों में जल्दी ठीक भी नहीं होता क्योंकि फंगस को शरीर में ताकतवर निमंत्रण मिल जाता है। जब ब्लड शुगर अनियंत्रित रहता है तो योनि के स्राव में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। ये अतिरिक्त शुगर कैंडिडा के लिए तैयार भोजन बन जाता है। डायबिटिक महिलाओं में यीस्ट इंफेक्शन न सिर्फ ज्यादा होता है, बल्कि बार-बार लौटता है और इलाज में भी मुश्किल पैदा कर सकता है

कमजोर Immunity

जब शरीर की रक्षा प्रणाली कमजोर पड़ जाती है तो चाहे HIV, लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने, कीमोथेरेपी, या अन्य पुरानी बीमारियों के कारण तो फंगस बिना किसी रोक-टोक के बढ़ने लगता है। कमजोर इम्यूनिटी वाली महिलाओं में संक्रमण जल्दी होता है, गंभीर रूप ले सकता है और बार-बार लौटता रहता है। शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा जब थक जाती है, तो कैंडिडा आसानी से हावी हो जाता है।

ये सभी कारक एक साथ मिलकर महिलाओं में फंगल इंफेक्शन को पुरुषों की तुलना में कहीं ज्यादा आम बना देते हैं। लेकिन अच्छी बात ये है कि इनमें से कई कारणों पर हम कण्ट्रोल कर सकते नियंत्रण है। सूती कपड़े पहनना, शुगर कंट्रोल रखना, गीले कपड़े जल्दी बदलना, वजन संतुलित रखना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना इन छोटी-छोटी आदतों से इस इन्फेक्टिन की समस्या को काफी हद तक बदला जा सकता है।

Fungal Infection Symptoms

शरीर में अलग अलग हिस्सों में फंगल इंफेक्शन देखा जाता है स्किन के हिसाब से इसके लक्षण अलग हो सकते हैं, लेकिन ज्यादातर महिलाओं में कुछ आम लक्षण साफ नजर आते हैं। ये लक्षण हल्के से शुरू होकर तेज बेचैनी पैदा कर सकते हैं।

महिलाओं में फंगल इंफेक्शन

  1. खुजली: यह किसी भी फंगल इन्फेक्शन में होने वाला सबसे पहला और सबसे परेशान करने वाला लक्षण है। ये इतनी तेज हो सकती है कि रात को नींद न आए। योनि, स्तनों के नीचे, जांघों के बीच या बगल में खुजली होना फंगल इंफेक्शन का क्लासिक सिग्नल होता है।
  2. लालपन: इन्फेक्शन की जगह वाली स्किन लाल हो जाती है। कभी-कभी लालिमा के साथ सूजन भी नजर आती है। स्किन फोल्ड्स में ये लालपन साफ दिखता है।
  3. जलन: खुजली के साथ जलन या जलन जैसा महसूस होना आम है। पेशाब करते समय या कपड़े पहनते समय जलन बढ़ जाती है, खासकर वैजाइनल इंफेक्शन में।
  4. गोल दाने: डर्मेटोफाइट्स से होने वाले इंफेक्शन में गोलाकार या रिंग जैसे दाने या कह सकते है कि चकत्ते बनते हुए दिखाई देते हैं। किनारे लाल और बीच में साफ नजर आते हैं। कैंडिडा में छोटी-छोटी फुंसियाँ या सैटेलाइट घाव भी बनने की सम्भावना रहती हैं।
  5. सफेद परत: योनि में गाढ़ा सफेद डिस्चार्ज  होना वैजाइनल यीस्ट इंफेक्शन की खास पहचान है। स्किन पर भी सफेद, गीली या मैसी लेयर चढ़ सकती है, खासकर स्तनों के नीचे या जांघों के बीच।

दुर्गंध कब होती है?

ऐसे तो फंगल इन्फेक्शन में गंभीर स्थिति में ही बदबू आती है लेकिन हल्की यीस्ट जैसी गंध हो सकती है। अगर तेज मछली जैसी या बहुत बुरी गंध आए तो ज्यादातर बैक्टीरियल इंफेक्शन या सेकेंडरी बैक्टीरियल इंफेक्शन की संभावना होती है। फंगल इंफेक्शन अकेले आमतौर पर बदबूदार नहीं होता।

कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?  लक्षण 2-3 दिन में ठीक न हों या बढ़ रहे हों

  • बार-बार इंफेक्शन हो रहा हो
  • तेज दर्द, सूजन, बुखार या मवाद हो
  • गर्भावस्था में लक्षण दिखें
  • डायबिटीज या कमजोर इम्यूनिटी हो
  • घर के इलाज से आराम न मिले

इसलिए महिला जो जिम्मेदारियों में घिरी हुई है और इन्फेक्शन इसमें जल्दी हो जाता है तो किसी भी तरह की छोटी लापरवाही बड़ी समस्त बन सकती है जल्दी डॉक्टर को दिखाने से सही निदान और सही इलाज मिलता है, और समस्या गंभीर होने से बच जाती है।

Fungal Infection से बचाव के आसान तरीके

बचाव के आसान तरीके फंगल इंफेक्शन से बचने के लिए जटिल इलाज की जरूरत नहीं, छोटी-छोटी आदतें काफी हैं:

  • सूती अंडरवियर पहनें-सिंथेटिक और टाइट कपड़ों से बचें। सूती कपड़े हवा लगने देते हैं और नमी को कम करते हैं।
  • गीले कपड़े जल्दी बदलें -जिम, स्विमिंग या पसीने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
  • क्षेत्र को सूखा रखें-नहाने के बाद स्तनों के नीचे, जांघों के बीच और योनि क्षेत्र को अच्छी तरह सुखाएं।
  • शुगर कंट्रोल रखें-डायबिटीज हो तो ब्लड शुगर नियमित जांच करवाएं और कंट्रोल में रखें।
  • एंटीबायोटिक सावधानी से लें-जरूरत पड़ने पर ही डॉक्टर की सलाह से लें, क्योंकि ये अच्छे बैक्टीरिया खत्म कर सकते हैं।
  • साफ-सफाई का ध्यान रखें-हल्के साबुन से सफाई करें, लेकिन ज्यादा धोने या स्सेंटीड प्रोडक्ट्स से बचें।
  • वजन संतुलित रखें-मोटापा त्वचा की सिलवटों में नमी बढ़ाता है।
  • पैड बार-बार बदलें-पीरियड्स के दौरान सैनिटरी पैड या टैम्पोन को समय पर बदलते रहें।
  • ढीले कपड़े पहनें-खासकर गर्मी में टाइट जीन्स और लेगिंग्स से परहेज करें।

ये आसान आदतें अपनाकर आप फंगल इंफेक्शन के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं। अगर समस्या बार-बार हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

Conclusion :

फंगल इंफेक्शन महिलाओं में ज्यादातर और काफी आम समस्या है, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है। ज्यादातर मामलों में यह गंभीर नहीं होता और सही देखभाल से ठीक हो जाता है।  लेकिन यह समझने की बात है कि नमी, गर्मी, हार्मोन में बदलाव और कुछ आदतें फंगस को बढ़ने का मौका देती हैं। सूती कपड़े पहनें, गीले कपड़े जल्दी बदलें, शुगर कंट्रोल में रखें, वजन संतुलित रखें और साफ-सफाई का ध्यान रखें।  अगर खुजली, जलन या डिस्चार्ज हो तो खुद से दवा लगाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

जल्दी इलाज कराने से समस्या जल्दी ठीक होती है और बार-बार होने से भी बचाव होता है। अपनी सेहत का ख्याल रखना कोई स्वार्थ नहीं, बल्कि आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। जैसे हर जिम्मेदारी को आप अपना दायित्व समझती है वैसे ही आपके स्वास्थ्य की चगोटी छाती आदतों के बारे में समझना और हर बीमारी से आपको बचने की जानकारी देना हमारा दायित्व है, छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आप इस परेशानी से काफी हद तक मुक्त रह सकती हैं। स्वस्थ शरीर ही खुशहाल जिंदगी की असली नींव है।

Medical Disclaimer

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार का मेडिकल सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। फंगल इंफेक्शन या किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए स्वयं दवा न लें और न ही सिर्फ इस लेख के आधार पर कोई निर्णय लें।

सही निदान और इलाज के लिए हमेशा योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें। हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए लक्षण और उपचार भी अलग हो सकते हैं। लेखक या प्रकाशक किसी भी नुकसान, दुष्प्रभाव या गलत उपयोग के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

महिलाओं में फंगल इंफेक्शन कितना आम है?

लगभग 75% महिलाओं को जीवन में कम से कम एक बार होता है।

क्या हर खुजली फंगल इंफेक्शन होती है?

नहीं। खुजली के और भी कई कारण हो सकते हैं।

फंगल इंफेक्शन बार-बार क्यों होता है?

हार्मोन, नमी, डायबिटीज, एंटीबायोटिक और टाइट कपड़ों की वजह से।

गर्भावस्था में यीस्ट इंफेक्शन क्यों ज्यादा होता है?

एस्ट्रोजन बढ़ने से फंगस को बढ़ने का अनुकूल माहौल मिलता है।

फंगल इंफेक्शन किन जगहों पर होता है?

स्तनों के नीचे, जांघों के बीच, योनि, बगल, नितंब और त्वचा की सिलवटों में।

क्या फंगल इंफेक्शन से दुर्गंध आती है?

आमतौर पर नहीं। तेज बदबू बैक्टीरियल इंफेक्शन की निशानी है।

टाइट जीन्स से क्या समस्या होती है?

नमी और गर्मी फंस जाती है, जिससे फंगस बढ़ता है।

डायबिटीज में फंगल इंफेक्शन क्यों ज्यादा होता है?

हाई शुगर फंगस के लिए भोजन का काम करता है।

कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

लक्षण न जाएं, बार-बार हों या तेज दर्द/सूजन हो तो।

फंगल इंफेक्शन से कैसे बचें?

सूती कपड़े पहनें, शुगर कंट्रोल रखें और साफ-सुथरे रहें।

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