Abstract
डर और चिंता होना मनुष्य जीवन का कोई असामान्य हिस्सा नहीं है, और कभी-कभी डर का और चिंता का होना जायज़ भी है , क्योकि ये हमे कही सारे खतरों और नुक्सान से बचने में मददगार साबित होता है, समस्या तब होती है जब ये डर अकारण हमारे जीवन में जगह बना ले,
दिल तेज़ी से धड़कता है, सांस लेने में कठिनाई मेहसूस होती है शरीर , शरीर कापने लगता है , अचानक बहुत गर्म हो जाता है जिससे ऐसा लगता है की कोई गंभीर समस्या है, पर ऐसा होता नहीं इस सब के पीछे clevelandclinic वजह बताता है हैं हमारे मस्तिष्क का एक हिस्सा Amygdala को, और ऐसे अनजान समस्याओ का हमने नाम सुना होता है एंग्जायटी अटैक या पैनिक अटैक और ज्यादातर लोग इन दोनों अलग शब्दों को एक ही समझने की गलती करते है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम जानेंगे की दोनों में क्या फर्क होता है, और कैसे इनका प्रबंधन किया जा सकता है, या क्लब आपको चिकित्सकीय सलाह की आवश्ययकता होती है,
Introduction
हम भारतीयों में यह विडम्बना है जो दिखता है उसी बात को महत्व दिया जाता है यहाँ शारीरिक बीमारियों को तो बीमारी माना जाता है लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को हम इतनी ज्यादा तवज्जो नहीं देते और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के स्तर को इतना निम्न कर दिया गया है कि कोई व्यक्ति इससे पीड़ित भी हो और इस परेशानी को किसी के साथ साझा भी करना चाहे तो उसे शर्मिंदगी महसूस करा दी जाती है, पर अब स्थितियाँ धीरे धीरे बदलती जा रही हैं।
लोगों ने इसके बारे में खुल के बात करना शुरू किया है, और जब इन विषयों पर बात की जा रही हो तो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े शब्दों में थोड़ा कन्फ्यूजन होना सामान्य है, सबसे सामान्य और ज्यादा कन्फ्यूजिंग शब्दों में से दो शब्द एंग्जायटी और पैनिक अटैक हैं, लोग अक्सर इन दोनों ही शब्दों को एक समझ लेने की गलती कर देते हैं, इन दोनों शब्दों के कुछ लक्षण एक दूसरे से मेल खा सकते हैं पर ये दोनों शब्द और इनके अंतर्गत आने वाली परेशानियाँ एक दूसरे से काफी अलग-अलग होती हैं, इनके निदान और उपचार के तरीके भी भिन्न हो सकते हैं।
Panic Attack क्या होता है?
पैनिक अटैक एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को अचानक अकारण तीव्र भय या असहजता महसूस होने लगती है जिसमें मनुष्य को एक साथ कई सारे मानसिक और शारीरिक लक्षण देखने को मिल सकते हैं,
इस दौरान खतरा वास्तविक भी हो सकता है और नहीं भी, कई बार यह अनियंत्रित होकर ऐसी जगह भी हमें खतरे का एहसास करवा देता है वास्तविकता में कोई खतरा नहीं होता इसी कारण शरीर किसी बड़े खतरे से निपटने वाली स्थिति में चला जाता है।
पैनिक अटैक की एक खास विशेषता है, इसके लक्षण कुछ ही मिनटों में चरम पर पहुंच जाते हैं, और शरीर को असामान्य स्थिति में ले जाते हैं,
पैनिक अटैक एक लघुकालीन समस्या है जो आपके शरीर में कुछ समय में अपने चरम पर जाती है और, थोड़े समय ऐसी ही असहज स्थिति को बनाए रखती है और फिर सामान्य अवस्था में आ जाती है।
National Institute of Mental Health (NIMH) के अनुसार, Panic Attack के दौरान तेज धड़कन, सांस लेने में कठिनाई, कांपना, चक्कर आना, सीने में दर्द और नियंत्रण खोने का डर महसूस हो सकते हैं।
पैनिक अटैक के दौरान डर का इतना वास्तविक होने का कारण
मानवीय डर केवल विचारों तक अपनी सीमाएँ नहीं रखता, जब मस्तिष्क खतरे को महसूस करता है, हमारे शरीर में एक साथ कई सारे बदलाव देखने को मिलते हैं, जो हमारी समझ में ना आने के कारण हमें परेशान करने वाले कुछ विचार निम्नलिखित हैं:
दिल की धड़कन बढ़ने पर व्यक्ति को लग सकता है कि उसे हृदय संबंधी कोई बड़ी समस्या हो गई है, पर आपने ध्यान दिया होगा कि वास्तविक खतरे जैसे ऊंचाई से झांकना या ऊंचाई से कूदने के डर में भी हमारे दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं, पर उस स्थिति में खतरा ज्ञात कारण बढ़ी हुई दिल की धड़कनें परेशान नहीं करती जितनी एक काल्पनिक डर की स्थिति में करती हैं,
साँसे : सांस लेने की प्रक्रिया में भी अचानक आया बदलाव हमे असहज कर सकता है
शरीर का अचानक तीव्रता के साथ गरम हो जाने से आपको बुखार जैसा महसूस करा सकता है।
और ऐसी स्थिति में डर और बढ़ जाता है जब शरीर इसे कोई बड़ी गंभीर बीमारी का संकेत मान ले,
पैनिक अटैक की अवधि
आम तौर पर यह लघुकालीन समस्या कुछ लोगों को पूरे जीवन में 2-3 बार ही देखने को मिलती है, कुछ लोगों के दैनिक जीवन में यह अपनी जगह बना लेती है, जिसे पैनिक डिसऑर्डर भी कहा जाता है।
Expected और Unexpected Panic Attack में क्या अंतर है?
Expected पैनिक अटैक: एक ऐसी स्थिति जिससे गुजरते समय शक्ति को बहुत ज्यादा मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा हो उसके सामानांतर किसी दूसरी सामस्य का आभास उस व्यसक्ति में पैनिक अटैक को सक्रिय कर सकता है
Unexpected Panic Attack: इसमें व्यक्ति को कोई स्पष्ट ट्रिगर समझ नहीं आता है, ये किसी भी समय आ सकते हैं, और कारण अस्पष्ट होने की वजह से ये हमें ज्यादा परेशान कर सकते हैं।
इन दोनों ही स्थिति में पैनिक अटैक तीव्र हो सकते हैं बस फर्क इतना है कि हम उन्हें पहचान पा रहे हैं या नहीं
बात अगर चिकित्सकीय मूल्यांकन पर की जाए तो, इसके अन्य संभावित कारणों और , उनसे व्यक्ति के जीवन में उनसे पढ़ने वाले प्रभावों को भी देखा जाता है,इसलिए एक घबराहट का तीव्र अनुभव होने पर खुद को पेनिक डिसऑर्डर का मरीज मान लेना सही नहीं है,
Anxiety Attack क्या होता है?
Anxiety Attack एक ऐसा शब्द है जिसे लोग सामान्य बोलचाल में अत्यधिक चिंता, बेचैनी या घबराहट की स्थिति को बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
लेकिन एक महत्वपूर्ण बात जिसे समझना चाहिए कि Anxiety Attack, DSM-5-TR में अलग से परिभाषित कोई बीमारी नहीं माना जाता है, पर इसका यह मतलब नहीं है कि इसे ठीक करने की ज़रूरत नहीं है, इसके विपरीत , पैनिक अटैक्स को एक स्पष्ट Clinical Phenomenon माना गया है।
Anxiety धीरे-धीरे कैसे बढ़ती जाती है
हमारी चिंता का अक्सर सीधा संबंध अनिश्चितता, आशंका या विपरीत परिणमों से हो सकता है।
किसी काम को करते उससे मिलने वाले परिणाम विपरीत हो जाने की सोच , बार – कठिनाइयों के विचार ,किसी एक परेशानी को खत्म करने के बाद तुरंत किसी दूसरी परेशानी का सामने आना जो व्यक्ति को मानसिक रूप से थका सकता है, और परेशानियों का यह सिलसिला रुकनेव का नाम ही नहीं लेता जिनके कारन इंसान के जीवन में अत्यधिक दबाव और तनावपूर्ण स्तिथि बन जाती है,
मांसपेशियाँ कसी हुई महसूस हो सकती हैं। नींद पूरी होने के बाद भी थकान बनी रह सकती है, सिरदर्द,बेचैनी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी का सामना करना पढ़ सकता है।
कभी किसी चिंता के अधिक बढ़ जाने के कारण भी लोग उसे anxiety attack कहने लगते हैं , वैसे तो anxiety ज्यादातर मामलो में धीरे – धीरे अपनी जगह बनती है लेकिन कही बार चिंता के अधिक बढ़ जाने पर पानिक अटैक भी आ सकता है। जिससे हमें यह समस्या और भी ज्यादा गंभीर लग सकती हैं
सामान्य चिंता और Anxiety Disorder में अंतर
चिंता खुद में कोई बड़ी बिमारी नहीं है इसका होना हमारे जीवन का एक हिस्सा भी है, जो हमें कहि सरे कामो को सही समय पर करने में मदद भी करता है, समस्या तब होती है जब चिंता का स्तर बहुत अधिक बढ जाए और हमारे नियत्रण से बहार हो जाये , कभी कभी हम अकारण भी चिंता को हमारे जीवन में जगह दे देते है जिससे हमारी दैनिक जीवन शैली प्रभावित होती है, चिंता के कुछ सामान्य कारण
- आने वाली परीक्षा
- मह्रत्त्वपूर्ण निर्णय
- स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां
ऊपर दी गई कुछ चिंताएँ सामान्य जीवन का हिस्सा हो सकती हैं, इन चिंताओं का सामना लगभग कहीं सारे लोगों को अपने दैनिक जीवन में करना पड़ता है।
लेकिन जब जीवन की यही परेशानियां बढ़ जाए या चिंता नियंत्रण के बहार हो, आपको सामान्य जीवन जी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़े तब anxity disorder की संभावना का मूल्याङ्कन करने की जरुरत होति है।
उदाहरण के लिए, Generalized Anxiety Disorder (GAD) में कही बार व्यक्ति बहुत सारे विषयो को एक साथ ररख कर अत्यधिक चिंता कर सकता है। वयस्कों में इसके निदान के लिए कम से कम छह महीनों तक , चिंता से जुड़े सभी लक्षणों का मूल्यांकन किया जाता है, पर इसका यह बिलकुल मतलब नहीं है की छः महीनो से पहले सहायता के लिए नहीं जाया जा सकता
Panic Attack और Anxiety Attack के लक्षणों में क्या अंतर है?
Panic Attack और Anxiety Attack के लक्षण कई बार इतने सामान्य होते हैं कि उनमें फर्क कर पाना मुश्किल हो जाता है, Panic Attack और Anxiety Attack की स्थिति में नज़र आने वाले कुछ समान लक्षण
- दिल की धड़कन का बहुत तेज़ होना
- शरीर से बहुत ज्यादा आना
- सांस लेने में परेशानी होना
ये लक्षण दोनों ही स्थिति में दिखाई दे सकते हैं, असल कारण पता करने के लिए इनकी तीव्रता पर ध्यान दिया जा सकता है
Panic Attack के प्रमुख लक्षण
Panic Attack के दौरान व्यक्ति को अपने शरीर में कही सारे असामान्य और तीव्र बदलाव देखने को मिलते है।
- दिल की धड़कन तेज होना : पैनिक अटैक के दौरान किसी भी इंसान की धड़कने सामान्य से अधिक बढ़ जाती है जिससे उसे बार बार आपने दिल की धड़कन को जाचं करना पड़ता है , और अटैक के दौरान व्यक्ति की तेज़ धड़कने उसे यह मेहसूस करा सकती है, की उसे हृदय संबंधी कोई समस्या है।
- काँपना और पसीना आना : हाथ-पैर अचानक से बहुत तेज़ काँप सकते हैं, इसके पीछे का कारण डर भी हो सकता है।
- डर : पेनिक अटैक के दौरान मनोकल्पित दर का भी एहसास होता है जो ऐसे सिग्नल्स देता है की कुछ तो बुरा होने वाला है
अवास्तविकता का अनुभव: कुछ लोगों में अटैक्स के दौरान अवास्तविकता को भी महसूस किया जा सकता है, जिससे उन्हें अस्सपस्स की दुनिया अलग लग सकती है या वे खुद को सभी से अलग महसूस करने लगते है।
हर पैनिक अटैक में ये सभी लक्षण दिखाई देना ज़रूरी नहीं है यह सभी लक्षण अलग-अलग लोगों में बदलाव के साथ दिखाई दे सकते है।
Anxiety से जुड़े सामान्य लक्षण
Anxiety की समस्या पैनिक अटैक्स के विपरीत होती है जहां पैनिक अटैक बहुत तीव्र और कम समय के लिए होते हैं वहीं anxiety एक दीर्घकालीन समस्या है जो क्रमिक होकर बढ़ती जाती है, लेकिन लम्बे समय तक बने रहने से यह आपके मानसिक स्वस्थ्य पर डाल सकती है।
- इन लक्षणों को देखकर समस्या को पहचानने में मदद मिल सकती है।
- लगातार बेचैनी: बिना किसी तत्काल खतरे के भी मन परेशान रह सकता है। आराम करने की कोशिश के बावजूद मानसिक शांति महसूस नहीं होती।
- बार-बार चिंता करना: व्यक्ति अक्सर ऐसी बातो के समाधनो को सोच सकता है जो अभी उसके नियंत्रण से बहार है।
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई: पढ़ते समय ध्यान लगाने बहुत ज्यादा परेशानी और बार-बार परिणामों पर ध्यान जा सकता है।
- मांसपेशियों में तनाव: गर्दन, कंधे, पीठ या जबड़े की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है।
- नींद की समस्या: कभी-कभी अच्छे से नींद लेने के बाद भी शरीर को नींद की अपूरति महसूस होने लगती है, और बार बार नींद के झोके आने लग सकते है, जिससे दैनिक कार्यो में बाधा आने लगती है ।
- चिड़चिड़ापन और थकान: लगातार मानसिक तनाव और चिंता से व्यक्ति चिड़चिड़ा होने लगता है जिसका असर उसके बाकी कामो पर भी होने लगता है ।
- शारीरिक परेशानी: सिरदर्द, पेट में असहजता, धड़कन बढ़ना, पसीना और सांस फूलना भी Anxiety के कारण देखने कोमिल जाते है ।
Panic Attack vs Anxiety Attack: दोनों के बीच मुख्य अंतर
दोनों अनुभवों में समानताएं हैं, लेकिन कुछ विशेषताओं को समझने से इनके बीच अंतर अधिक स्पष्ट हो सकता है।
| तुलना का आधार | Panic Attack | Anxiety Attack |
| चिकित्सकीय स्थिति | परिभाषित Clinical Phenomenon | औपचारिक Diagnosis नहीं |
| शुरुआत | अक्सर अचानक | धीरे-धीरे या अचानक |
| तीव्रता | आमतौर पर बहुत अधिक | हल्की से अत्यधिक |
| चरम स्थिति | कुछ मिनटों में | कोई निश्चित पैटर्न नहीं |
| अवधि | तीव्र चरण अक्सर कुछ मिनटों का | चिंता लंबे समय तक बनी रह सकती है |
| Trigger | स्पष्ट या अस्पष्ट | अक्सर किसी चिंता या आशंका से जुड़ा |
| मानसिक अनुभव | तीव्र भय, खतरे या नियंत्रण खोने का एहसास | बेचैनी, आशंका और लगातार चिंता |
| शारीरिक लक्षण | अचानक तेज धड़कन, कांपना, सांस की परेशानी | मांसपेशियों में तनाव, थकान, नींद की समस्या और अन्य लक्षण |
| दैनिक जीवन पर प्रभाव | अगले Attack का डर और परिस्थितियों से बचना | लगातार चिंता से काम, नींद और संबंध प्रभावित होना |
इन लक्षणों के होने का अर्थ अपने आप में किसी Anxiety Disorder का निदान नहीं है। दूसरे शारीरिक कारणों की जांच भी देखि जानी चाहिए ।
यह तुलना सामान्य प्रवृत्तियों को समझाती है, कोई निश्चित Diagnostic Test नहीं है। व्यक्ति को Panic Attack और Anxiety दोनों का अनुभव हो सकता है।
क्या Panic Attack हमेशा Anxiety से ज्यादा गंभीर होता है?
जरूरी नहीं।Panic Attack की तीव्रता बहुत अधिक होती है पर ये हमेशा anxiety से आगे नहीं रहती कभी-कभी हमारे मन में लंबे समय तक रहने वाली चिंता भी जीवन पर बुरा असर डाल सकती है ,किसी भी परेशानी की गंभीरता केवल इस आधार पर तय नहीं की जा सकती कि वो कितनी जल्दी शुरू हुई है , या वो कितनी लम्बे समय तक बानी रहती है, यह देखा जाना भी जरुरी है की इनके कारण किसी व्यक्ति का दैनिक जीवन कितना प्रप्रभावित होता है।
क्या Anxiety के दौरान भी Panic Attack आ सकता है?
हां।लंबे समय से चिंता से परेशान व्यक्ति को अचानक से पैनिक अटैक भी आ सकता है, और ऐसे समय में ये अनुभव और भी बुरा हो जाता है। इसलिए दोनों को पूरी तरह अलग और एक-दूसरे से असंबंधित स्थितियाँ मानना भी सही नहीं होगा।
आखिरकार, किसी अनुभव को कौन-सा नाम दिया गया है, उससे अधिक महत्वपूर्ण है उसका वास्तविक प्रभाव और उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन।
Panic Attack और Anxiety के दौरान दिमाग और शरीर में क्या होता है?
Amygdala: मस्तिष्क खतरे को कैसे पहचानता है?
मस्तिष्क का Amygdala हिस्सा भावनाओ, विशेषकर डर और विशेष कर यह पहचानने की भूमिका निभाना होता है की कहही कोई खतरा तो नही, जब दिमाग ऐसी किसी परिस्थिति को महसूस करता है , तो Amygdala के साथ प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स और हिप्पोकैंपस जैसे कई न्यूरल नेटवर्क मिलकर शरीर को प्रतिक्रिया के लिए तैयार करते हैं। सामान्य स्तिथि में यह प्रणाली हमारी सुरक्षा करती है लेकिन एंग्जायटी डिसऑर्डर में यह संतुलन बिगड़ जाता है
Fight-or-Flight Response क्या है?
जब शरीर किसी खतरे का अनुमान लगाता है, तो वह उससे मुकाबला करने या भागने के लिए Fight-or-Flight Response को सक्रिय करता है। इस प्रक्रिया में Sympathetic Nervous System के सक्रिय होने से दिल की धड़कन बढ़ जाती है और मांसपेशियां अधिक एक्टिव हो जाती हैं। खतरा वास्तव में हो तो यह प्रक्रिया हमारे लिए बहुत उपयोगी होती है, लेकिन पैनिक और एंग्जायटी के समय ये एहि हमारे लिए समस्या भी खड़ी कर सकता है
Adrenaline और Cortisol की क्या भूमिका होती है?
तनाव की स्थिति में Adrenaline हार्मोन शरीर को तुरंत सतर्क और सक्रिय करता है, जिससे दिल तेजी से धड़कने लगता है। इसके विपरीत, Cortisol हार्मोन तनाव की लंबी परिस्थितियों के अनुरूप शरीर को ढालने का काम करता है। NHS (नेशनल हेल्थ सर्विस) के अनुसार, डर और चिंता के दौरान इन स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर बढ़ने से ही शरीर में तेज धड़कन और पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
सांस तेज होने पर चक्कर क्यों आ सकते हैं?
पैनिक अटैक की स्थिति में व्यक्ति तेज़ी से सांस लेने लगता है, जिसे Hyperventilation कहा जाता है। तेज़ सांस लेने से शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर तेज़ी से कम होने लगता है , जिससे चक्कर आना, सिर हल्का होना और उंगलियों में झुनझुनी जैसे लक्षण पैदा होते हैं। इन शारीरिक लक्षणों से व्यक्ति का डर और बढ़ जाता है, जिससे सांसें और तेज हो जाती हैं और घबराहट का एक चक्र बन जाता है।
Panic Attack और Anxiety के पीछे कौन-से कारण हो सकते हैं?
- लंबे समय का मानसिक तनाव: जब कोई व्यक्ति लगातार काम के दबाव,पेसो की परेशानी या अपने रिश्तो में लगातार लड़ाई देखता रहे तो उसका दिमाग थक जाता है ,और पैनिक अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
पारिवारिक इतिहास और आनुवंशिकी
कभी-कभी यह समस्या हमारे जेनेटिक्स से मिलती है। अगर परिवार में पहले से किसी को एंग्जायटी रही हो, तो दूसरों में इसकी संवेदनशीलता का स्तर बड़ा हुआ देखा जा सकता है। हालांकि, यह केवल जीन पर नहीं, बल्कि हमारे माहौल पर भी निर्भर करता है।
- अतीत के कड़वे अनुभव: बचपन का कोई हादसा, गंभीर बीमारी या कोई बड़ा मानसिक आघात इंसान के भीतर गहराई से अपनी जगह बना लेता है। इसके कारण व्यक्ति में अक्सर किसी तरह की असुरक्षा दिखती रहती है।
- नींद की कमी और बिगड़ी दिनचर्या: अधूरी नींद इंसान को चिड़चिड़ा बना देती है और तनाव से लड़ने की ताकत छीन लेती है। यहाँ एक चक्र बन जाता है—चिंता के कारण नींद नहीं आती और नींद पूरी न होने से चिंता और बढ़ जाती है।
- कैफीन और अन्य उत्तेजक पदार्थ: ज्यादा चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स पीने से दिल की धड़कनमें अचानक से वृद्धि देखने को मिलती है। एंग्जायटी से जूझ रहे व्यक्ति को यह बदलाव पैनिक अटैक जैसा महसूस हो सकता है। सिगरेट और नशीले पदार्थ भी इसे बढ़ाते हैं।
- शारीरिक बीमारियां: हर बार घबराहट का कारण मन ही नहीं होता। थायराइड का बढ़ना, दिल या सांस की बीमारी, या अचानक ब्लड शुगर कम होने पर भी शरीर में वही लक्षण (तेज धड़कन, कांपना) पैदा होते हैं जो पैनिक अटैक में होते हैं। इसलिए डॉक्टर शारीरिक जांच को भी जरूरी मानते हैं।
Panic Attack या तीव्र Anxiety होने पर क्या करना चाहिए?
Panic Attack के दौरान व्यक्ति के लिए सबसे कठिन अनुभवों में से एक यह हो सकता है कि उसे अपने शरीर पर नियंत्रण कम होता महसूस हो।ऐसे समय में स्वयं को तुरंत सामान्य महसूस करने के लिए मजबूर करना हमेशा मददगार नहीं होता।ज्यादा उपयोगी है अपनी सुरक्षा पर ध्यान देना, सांस की गति को सहज रखने की कोशिश करना और ऐसे तरीकों का इस्तेमाल करना जिनसे
- वर्तमान परिस्थिति पर ध्यान लौट सके।
- सुरक्षित स्थान पर बैठें और शरीर को सहारा दें
- यदि अचानक चक्कर, कमजोरी या तीव्र घबराहट महसूस हो रही है, तो जल्दी से किसी सुरक्षित स्थान पर बैठे और अपने फ़ोन का sos ताकि समस्या बढ़ने पर अपने करीबी व्यक्ति से मदद मांग सके
- शरीर को आरामदायक स्थिति में रखें।
- पैनिक अटैक आने की स्थिति में कहीं बैठे और ध्यान से उस स्थिति का मुआयना करें समस्या की जड़ पता लगने पर भी उसे कम करने का कोई रास्ता मिल सकता है
सांस की गति को धीरे-धीरे सामान्य करें
घबराहट के दौरान कुछ लोग बहुत तेजी से सांस लेने लगते हैं।ऐसे में सांस को जबरदस्ती बहुत गहरा करने की बजाय सहज और नियंत्रित रखने का प्रयास उपयोगी हो सकता है।NHS के अनुसार, शांत Breathing Exercise तनाव, Anxiety और Panic के समय मदद कर सकती है।
आप इस तरह शुरुआत कर सकते हैं:
- आरामदायक स्थिति में बैठें और कंधों को ढीला छोड़ें।
- नाक से धीरे-धीरे सांस अंदर लें।
- बिना जोर लगाए मुंह या नाक से सांस बाहर छोड़ें।
- सांस लेने और छोड़ने की गति को सहज रखें।
- कुछ मिनट तक इसी प्रक्रिया पर ध्यान दें।
इस दौरान सांस रोककर रखने, बहुत तेजी से सांस लेने या किसी निश्चित गिनती तक पहुंचने के लिए स्वयं पर दबाव डालने की जरूरत नहीं है।यदि सांस लेने में गंभीर कठिनाई है, तो केवल Breathing Exercise पर निर्भर न रहें।
Grounding Technique का इस्तेमाल
Panic Attack या तीव्र Anxiety के समय व्यक्ति का ध्यान अपने शारीरिक लक्षणों और डरावने विचारों पर बहुत ज्यादा ध्यान देने लगता है ।
Grounding Technique का उद्देश्य ध्यान को वर्तमान में वापस लाने में मदद करना है।
इसका एक प्रचलित तरीका 5-4-3-2-1 Technique है।
5-4-3-2-1 Grounding Technique
- 5 ऐसी पाँच चीजों पर ध्यान दें जिन्हें आप देख सकते हैं।
- 4 चार चीजों को पहचानें जिन्हें आप छूकर महसूस कर सकते हैं।
- 3 अपने आसपास की तीन आवाज़ों को सुनने की कोशिश करें।
- 2 ऐसी खुशबू पहचानें जिन्हें आप महसूस कर सकते हैं।
- 1 किसी एक स्वाद पर ध्यान दें या कुछ चखें।
इस अभ्यास से कुछ लोग डर से अपना ड़याँ हटाने में खुद की मदद कर सकते है हालांकि यह सभी के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं होता और इसे किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का उपचार नहीं समझना चाहिए।यदि इससे असहजता बढ़ती है, तो इसे जारी रखने की बाध्यता नहीं है।
डॉक्टर की सलाह
डॉक्टर की सलाह इन स्थितियों में तुरंत लेनी चाहिए। जब सीने में तेज दर्द हो (जो हाथ या गर्दन तक जाए), सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो, चक्कर आकर बेहोशी छाने लगे, या जीवन में पहली बार ऐसा पैनिक अटैक आया हो, तो तुरंत इमरजेंसी डॉक्टर से मिलें। यह लक्षण हार्ट या थायराइड जैसी शारीरिक समस्या के भी हो सकते हैं। इसके अलावा, जब एंग्जायटी के दौरे बार-बार पड़ने लगें और हर समय अनहोनी का डर बना रहे, जिससे आपका काम करना, बाहर निकलना या सोना-खाना मुश्किल हो जाए, तो नियमित डॉक्टर या थेरेपिस्ट से संपर्क करना बहुत जरूरी हो जाता है।
conclusion
डर को समझना, उससे डरते रहने से बेहतर है। पैनिक अटैक और एंग्जायटी के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव जैसे तेज धड़कन, कांपना या सांस की तकलीफ पूरी तरह वास्तविक होते हैं, कोई कल्पना नहीं। पैनिक अटैक जहाँ अचानक कुछ ही मिनटों में अपने चरम पर पहुँच जाता है, वहीं आम भाषा में कहा जाने वाला ‘एंग्जायटी अटैक’ धीरे-धीरे बढ़ने वाली बेचैनी है।
हर चिंता को बीमारी नहीं मानना चाहिए, लेकिन जब ये लक्षण बार-बार आने लगें और आपका सामान्य जीवन सीमित होने लगे, तो डॉक्टर या थेरेपिस्ट की मदद लेना ही समझदारी है। इसके प्रभावी उपचार मौजूद हैं। डर पर हमेशा हमारा नियंत्रण नहीं होता, पर इसे समझकर सही दिशा में कदम उठाना पूरी तरह हमारे हाथ में है।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी योग्य डॉक्टर, Psychiatrist या Clinical Psychologist की व्यक्तिगत सलाह, जांच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। Panic Attack जैसे लक्षण कुछ गंभीर शारीरिक बीमारियों से मिलते-जुलते हो सकते हैं। यदि आपको पहली बार तीव्र घबराहट, सीने में दर्द, सांस लेने में गंभीर कठिनाई, बेहोशी या अन्य असामान्य लक्षण महसूस हों, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें। किसी भी दवा या उपचार में बदलाव केवल योग्य स्वास्थ्य पेशेवर की सलाह से करें।

Bhushal Birla is a content writer who enjoys writing about health, lifestyle, wellness, and everyday topics. He believes that useful information should be easy for everyone to read and understand. His articles focus on answering common questions, explaining important topics in simple words, and helping readers make informed decisions. Through his writing, he aims to share reliable information that readers can relate to and use in their daily lives.








